शनिवार, 13 जुलाई 2013

तस्वीरों में समाया मौसम मस्ताना 


कैमरा हाथ में रखना और इससे तस्वीरें खींचने का शौक तो सभी रखते हैं लेकिन हर मौसम को अपनी नजरों से देखना और प्रकृति के हर रंग की तस्वीरें कैमरे में कैद करने का हुनर सिर्फ फोटोग्राफर्स ही जानते हैं। बात अगर बारिश की हो तो इन फोटोग्राफर्स का कैमरे के प्रति जुनून देखते ही बनता है। हरी भरी वादियों और बारिश का मजा लेते नटखट बच्चों की तस्वीरें इनके कैमरे में तरह-तरह के एंगल से नजर आती हैं। शहर के फोटोग्राफर्स प्रकृति का मिजाज समझते हुए इसका भरपूर फायदा इन दिनों ले रहे हैं। सुहाने मौसम में एक नजर फोटोग्राफर्स की क्लिक पर...

मांडव का है अपना मजा
भावना जायसवाल
बारिश के मौसम में मालवांचल का हर क्षेत्र विशेष आकर्षण रखता है। इस मौसम में फोटो शूट करने की सबसे अच्छी जगह ओंकारेश्वर, महेश्वर और मांडव है। इसके अलावा ओरछा और चंदेरी हर फोटोग्राफर के लिए विशेष महत्व रखता है। प्रकृति इस समय पूरे शबाब पर है। ऐसे में अगर कुछ लोग यह मानते हैं कि बारिश का मौसम फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त नहीं है तो ये उनकी गलत सोच है, जबकि इस मौसम से अच्छी फोटोग्राफी किसी अन्य मौसम में हो ही नहीं सकती। हमारी धरोहरों को देखने के शौकीन लोगों को अपनी ये तमन्ना जरूर पूरी करना चाहिए क्योंकि हर चीज पानी में साफ हो जाने की वजह से बहुत खूबसूरत दिखाई देती है। वेसे फोटोग्राफी करने का सबसे अच्छा समय सुबह व शाम माना जाता है लेकिन जिस समय बारिश होना बंद हो जाती है और बादल बिल्कुल साफ नजर आते हैं, उससे अच्छा समय फोटोग्राफी के लिए नहीं हो सकता।
बरतें सावधानी
- अगर इस मौसम में आप घूमने जा रहे हैं तो जिस होटल में रुकना है, उसके बारे में पूरी जानकारी पहले से ही रखें।
- ये मौसम एडवेंचर के लिए बना है इसलिए घर में रहने के बजाय घूमने-फिरने का पूरा आनंद लें।
जंगलों के बीच फोटोग्राफी
हेमंत वायंगकर
बारिश में जंगल की हरियाली को अपने कैमरे में कैद करने का अपना ही मजा है। जब तेज बारिश हो तब घने जंगलों में जाना मुश्किल होता है लेकिन बारिश कम होते ही जंगलों में वन्य प्राणियों और हरे भरे पेड़ों की तस्वीरें लेना मुझे बेहद पसंद है। इस नजरिए से बांधवगढ़ और कान्हा जाना मैं पसंद करता हूं। भोपाल में बड़े तालाब के विभिन्न दृश्य और इसके आसपास के स्थानों जैसे भीमबैठका की तस्वीरें बहुत अच्छी आती हैं। मेरे लिए सूर्योदय के बाद का समय फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त है। इस समय प्रकृति के प्राकृतिक रंग बिल्कुल साफ दिखाई देते हैं। कुछ ऐसी तस्वीरें सिर्फ इसी मौसम में ली जा सकती हैं जैसे पानी में भीग रहे लोग, तेज पानी के बीच छतरी का उल्टा हो जाना, भीगते हुए बच्चे, छपाक से पानी में कूदना या बूंदों को हाथ में संजो लेना आदि जिन्हें हर युवा फोटोग्राफर्स को अपने कैमरे मेें
कैद करना चाहिए।
बरतें सावधानी
- जब भी घूमने जाएं तो अपने साथ कैमरा जरूर लेकर जाएं ताकि यादों को कैमरे में कैद किया जा सके।
- सुरक्षित स्थान से फोटोग्राफी करें। सिर्फ घूमने-फिरने ही नहीं, बल्कि चारों दिशाओं में फैली हरी भरी वादियों के बीच फोटोग्राफी करने के लिए भी घर से बाहर निकलें।
आंगन में प्रकृति का आनंद
शिशिर दीक्षित
इन दिनों मैं घर के आंगन में विभिन्न प्राकृतिक दृश्यों की फोटोग्राफी कर रहा हूं। पंछियों द्वारा पेड़ों पर घोंसले बनाना, कीट पतंगे, बारिश में फूलों पर पानी की बूंदों का जमा हो जाना मेरे प्रिय विषय हैं। वैसे मुझे मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों जैसे झाबुआ और ढिंढोरी में फोटोग्राफी करना पसंद है। बारिश का मजा लेने के लिए भोपालवासियों को कहीं और जाने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि यहां की खूबसूरती का निखार बारिश में देखते ही बनता है। वन विहार, केरवा डैम के आसपास बने गांव, रातीबढ़ और नीलबढ़ की तस्वीरें बहुत अच्छी आती हैं।
बरतें सावधानी
- इन दिनों उत्तराखंड में आई विपदा की वजह से लोगों में बारिश को लेकर डर स्वाभाविक है। कई बार आप जहां जाते हैं वहां के स्थानीय निवासियों द्वारा दी गई जानकारी के बाद भी लोग उनका पालन नहीं करते और बाद में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है इसलिए अगर आपको कोई पहले से सचेत करे तो उसकी बात ध्यान से सुनें और उस पर अमल भी करें।
- फिसलने वाले जूते पहनने से बचें। अपने साथ दवाइयां ले जाना न भूलें।
बेबी से पहले बेबीमून
ब्रिटेन के शाही परिवार का अगला वारिस दुनिया में कब आएगा, पिछले काफी वक्त से इसको लेकर कयास लगते रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट ने दावा किया है कि केट मिडलटन की डिलिवरी डेट तेरह जुलाई होगी। केट के मां बनने की खबर से लेकर बेबीमून के सफर तक की हर बात सुर्खियों में रही। इसी के साथ केट मिडलटन और प्रिंस विलियम का बेबीमून एक बार फिर गर्भावस्था के दौरान बेबीमून पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। बेबी के जन्म से पहले बेबीमून का ट्रेंड न सिर्फ अमेरिका, बल्कि भारत में भी तेजी से बढ़ रहा है...

 इस वक्त केट और प्रिंस विलियम का बेबीमून चर्चा में है। बेबीमून सिर्फ शाही परिवारों तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि अमेरिकन मीडिया हाउस द्वारा 2006 में किए गए सर्वे के अनुसार 59 प्रतिशत दंपति डिलीवरी से पहले बेबीमून का आनंद लेते हैं। बेबीमून की अवधारणा सिर्फ अमेरिका में ही नहीं, बल्कि भारत में भी है। इसे बढ़ावा देने के लिए हमारे देश के कई रिसोट्र्स और होटल्स विशेष ऑफर दे रहे हैं। बिजनेस वूमन पारुल ने केरल में बेबीमून का आनंद लिया। केरल की आयुर्वेदिक पद्धति और मसाज के बारे में पारुल को पहले से जानकारी थी। वहां की हरी भरी वादियों के बीच अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए उन्होंने मसाज सहित अन्य पद्धतियों का फायदा भी उठाया। मनोचिकित्सक डॉ. काकोली राय कहती हैं कि तेजी से प्रचलन में आया बेबीमून आपको सुकून की नींद सोने, एक दूसरे के साथ वक्त बिताने और प्यार भरे लम्हे जीने का भरपूर वक्त देता है। इसके फायदों को देखते हुए व्यस्त होने के बाद भी लोग बेबीमून पर जाना पसंद कर रहे हैं। जुलाई में केट मिडलटन की डिलीवरी से पहले इस शाही जोड़े ने वेस्टइंडीज के एक निजी आइसलैंड मस्टिक में बेबीमून मनाया। जिस भव्य विला में वे ठहरे थे उसका एक सप्ताह का किराया 30,000 डॉलर था। यहां उनकी निजता का पूरा ख्याल रखा गया। इस स्थान तक पहुंचने के लिए केट ने आठ घंटे की हवाई यात्रा की। समाजसेविका और टीवी एक्ट्रेस किम कारदाशियान ने बच्चे के जन्म से पहले रियो डि जेनेरियो में अपने प्रेमी केन्ये वेस्ट के साथ बेबीमून का मजा लिया। इस बारे में किम ने अपने ब्लॉग में लिखा
मुझे यह सुनकर दुख हो रहा है कि बच्चे के जन्म के बाद मैं कुछ समय तक उसके साथ यात्रा नहीं कर सकूंगी। गर्भावस्था में भी फैशन आइकन के रूप में प्रसिद्ध किम ने पांच इंच ऊंची हाई हील बेबीमून में भी पहनी। प्यार में डूबी इस जोड़ी का बेबीमून भी सुख्रियों में रहा जो ब्राजील की खूबसूरत वादियों में वक्त बिताने के बाद नाइजीरिया चला गया। गौरतलब है कि
पिछले महीने किम ने बेबी गर्ल को जन्म दिया। टीवी अभिनेत्री सांई और उनके पति शक्ति आनंद ने दो साल पहले बेबीमून की योजना अपने चंद दोस्तों के साथ बनाई। शक्ति इस बारे में कहते हैं  हमारी शादी को छह साल हो गए। अब वह समय आ गया है जब हमें परिवार को आगे बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए। उनके घर बच्चे का जन्म अगस्त में हुआ और इससे पहले ही सांई ने बेबीमून पर जाने की योजना बनाई। सांई के अनुसार बच्चे के जन्म के बाद कुछ सालों तक घूमना-फिरना मुश्किल रहेगा इसलिए उनके आने से पहले का समय कुछ खास होना चाहिए। सांई और शक्ति दोनों चाहते हैं कि उनके बच्चे का नाम संस्कृत के किसी शब्द से लिया जाए और इसीलिए दोनों ने संस्कृत की कई किताबें पढ़ डाली। अक्टूबर 2012 में विवेक ओबेराय अपनी पत्नी प्रियंका के साथ स्विट्जरलैंड बेबीमून के लिए गए थे। विवेक कहते हैं कि मेरी पत्नी और बहन दोनों की डिलीवरी एक ही महीने में होना है इसलिए मैं चाहता हूं कि अपने इस टूर में दोनों के लिए शॉपिंग करूं लेकिन घूमने-फिरने से ज्यादा ध्यान मुझे प्रियंका की खुशियों का भी रखना होगा ताकि गर्भावस्था में वह खुश रहे और एक स्वस्थ संतान को जन्म दे। गौरतलब है कि पिछले साल प्रियंका ने बेटे को जन्म दिया था।
बॉक्स में
-गर्भवस्था में सातवें महीने से पहले बेबीमून पर जाएं।
-सफर के दौरान भारी सामान उठाने से बचें।
-तैराकी करने और पहाड़ों पर चढऩे से बचें।
-अपने होटल या रेस्टोरेंट के पास स्थित अस्पताल की जानकारी अवश्य रखें।
कहां से आया बेबीमून
इस शब्द का उपयोग 1996 में सबसे पहले गर्भावस्था पर लेख लिखने वाली लेखिका शेला किटजिंगर ने किया था। यद्यपि उन्होंने बेबीमून को बच्चे के जन्म से पहले अभिभावकों को शांत और सुकून भरे पल साथ में बिताने के लिए प्रयुक्त किया था जिसे कुछ सालों बाद एक दूसरे के साथ घूमने फिरने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।
जब जाएं बेबीमून पर
-किसी स्पा में प्रेग्रेंसी मसाज करवाएं।
-समुद्र के किनारे वक्त गुजारें।
-खाने के दौरान पौष्टिकता का ध्यान रखें।
-प्रकृति के बीच पिकनिक की योजना बनाएं।
-बेबीमून पैकेज के बारे में पूरी जानकारी रखें और बजट के अनुरूप स्थान का चुनाव करें।

शनिवार, 11 मई 2013

मां से मैडम तक


घर में अगर वो मां की भूमिका निभाती हैं तो बाहर इन्हें मैडम कहने वालों की भी कमी नहीं है। देश की राजनैतिक ब्रिगेड में इनका खास स्थान है, वहीं स्टाइलिश पर्सनालिटी के रूप में भी वे छाई रहती हैं। अपनी-अपनी राजनैतिक पार्टी को मजबूत बनाने में वे कोई कमी नहीं रखना चाहती। इन्होंने अपनी राजनैतिक पार्टी की बागडोर मजबूती से थामने के अलावा मां की भूमिका भी बखूबी निभाई है....

प्रियंका गांधी
दमदार हस्ती- प्रियंका गांधी की राजनीति में भूमिका को विरोधाभास के रूप में देखा जाता है। हालांकि उत्तरप्रदेश में कांग्रेस पार्टी के लिए लगातार चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के निर्वाचन क्षेत्रों में एक लोकप्रिय व्यक्तित्व के रूप में छाई रहती हैं और लोगों को आकर्षित करने में सफल भी रही हैं।
वे करीबी हैं- राहुल गांधी और सोनिया गांधी की।
स्टाइल में भी नंबर वन- प्रियंका साड़ी पहने हुए जितनी खूबसूरत नजर आती हैं, उतने ही सलीके से वे शर्ट के साथ ट्राउजर पहनती हैं। भारतीय राजनीति में उनके डे्रस सेंस को पॉवर ड्रेसिंग का नाम दिया जाता है। लंबी आस्तीन वाले ब्लाउज के साथ कॉटन की साड़ी प्रियंका के स्टाइल सेंस का अंश है।
मां के रूप में- उनके दो बच्चे रेहान और मिराया हैं। वे कहती हैं कि मेरे बच्चे उनके आसपास स्थित सुरक्षा गार्ड की वजह से खुद को अन्य बच्चों से अलग महसूस करते हैं। उनके स्कूल में पढऩे वाले अन्य बच्चों में भी उन्हें लेकर उत्सुकता बनी रहती है लेकिन मैं उन्हें ये अहसास कराती हूं कि उन्हें अन्य बच्चों से अलग नहीं, बल्कि उन बच्चों जैसा ही बनना है। एक मां होने के नाते सही और गलत का अहसास कराना मेरा फर्ज भी है।
डिंपल यादव
डिंपल समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, विधानमंडल दल के नेता और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी हैं। वे कन्नौज से निर्विरोध सांसद चुनी गई हैं।
उनके करीबी हैं- मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव।
स्टाइल में भी आगे- स्टाइल के मामले में डिंपल की तुलना पाकिस्तान की हिना रब्बानी खार से की जाती है। तीन बच्चों की मां डिंपल की साड़ी पहनने का स्टाइल डिजाइनर्स के बीच भी उन्हें ग्लैमरस दिवा के रूप में पहचान दिलाता है।
मां के रूप में- उनके तीन बच्चे अदिति, अर्जुन और टीना हैं। डिंपल के अनुसार वे अपने बच्चों को गांवों में लेकर जाती हैं ताकि शहर के माहौल से दूर वे गांवों में बच्चों के साथ खेलें और वहां के शांत वातावरण को महसूस कर सकें।
किरण खेर
दमदार हस्ती -अभिनय के मंच पर चर्चित नाम है। वे पिछले तीन दशकों से फिल्मी दुनिया में छाई हुई हैं।
वे करीबी हैं- अरुण जेटली और नरेंद्र मोदी की।
उनकी स्टाइल- हैवी मेकअप, ब्रोकेड साड़ी और ज्वेलरी मनोरंजन की दुनिया के साथ-साथ  उनके राजनैतिक प्रोफाइल का भी हिस्सा है।
मां के रूप में - अभिनेत्री किरण खेर अपने बेटे सिकंदर खेर की परवाह किए बिना उस वक्त भी नहीं रह पाती, जब वह शूटिंग के लिए जाता है। वह कहती हैं कि मैं अपने बेटे को अभिनय से जुड़ी तमाम बारीकियां भी बताती हूं लेकिन ये बात अलग है कि वह उन बातों पर बहुत कम अमल करता है। एक मां होने के नाते अपने बेटे को फिल्म इंडस्ट्री के अच्छे-बुरे अनुभवों से अवगत कराना मेरी जिम्मेदारी भी है।
निर्मला सीतारमण
दमदार हस्ती- वे लंदन की एक रिसर्च कंपनी में कार्यरत थीं। हैदराबाद के परकला प्रभाकर नामक राजनैतिक विश्लेेषक के साथ उनका विवाह हुआ। उनका हैदराबाद में एक स्कूल है जिसे वे खुद संभालती थीं।
वे करीबी हैं- राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज की।
स्टाइल में भी आगे- वे अक्सर ग्रीन, पर्पल और ब्लू कलर की प्रिंटेड साड़ी पहने हुए नजर आती हैं। ज्वेलरी के रूप में उन्हें टॉप्स पहनना पसंद है।
मां के रूप में - निर्मला एक बेटी की मां हैं। देश में बढ़ती असुरक्षा के बीच अपनी बेटी के लिए उनकी चिंता इन शब्दों में बयां होती है- जब मैं मेरी बेटी की उम्र की थी तो कभी बड़े शहरों में नहीं रही। घर के बाहर का माहौल भी आज की तरह इतना असुरक्षित नहीं था लेकिन अगर मैं अपनी बेटी की बात करूं तो उसके घर से बाहर जाते ही मेरी चिंता बढ़ जाती है। हां, इतना जरूर है कि अब बेटियां परिस्थितियों के प्रति जागरूक हैं और खुद को संभालना जानती हैं।

शायना एन सी
दमदार हस्ती- वह फैशन डिजाइनर हैं। उनके पिता नाना चौदसामा मुंबई के शेरिफ पद से सम्मानित थे।
वो करीबी हैं- अरुण जेटली, नितिन गड़करी, नरेंद्र मोदी और एल के आडवाणी की।
स्टाइल में भी आगे- भाजपा प्रवक्ता के रूप में प्रसिद्ध ये फैशन डिजाइनर भारतीय राजनीति का एक ऐसा चेहरा है, जिसे वेस्टर्न और इंडियन दोनों तरह के आउटफिट पहने देखा जाता है।
मां के रूप में- शायना अपने बच्चों शनाया और अयान के साथ वक्त बिताकर अपनी थकान दूर करती हैं। उनके अनुसार हफ्ते भर के काम पूरे करने के बाद बच्चों के साथ लंदन के पार्क में समय बिताना पसंद है। पूना स्थित अपने घर में बच्चों के साथ समय बिताने से बढ़कर खुशी की बात एक मां होने के नाते मेरे लिए कुछ और नहीं हो सकती।
सुषमा स्वराज
दमदार हस्ती- वे भारत की पंद्रहवीं लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता चुनी गई हैं। इससे पहले वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में रह चुकी हैं और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रही हैं।
वो करीबी हैं- राजनाथ सिंह और शिवराज सिंह चौहान की।
स्टाइल में भी आगे- माथे पर बड़ी बिंदी और बार्डर वाली साड़ी पहनना उन्हें खूब पसंद है।
मां के रूप में- मेरी बेटी बांसुरी के साथ बिताने के लिए मेरे पास समय की कमी चाहे रही हो लेकिन मैंने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को हमेशा अलग-अलग ही रखा है। उसकी परीक्षा के दिनों में मैं उसके साथ रहती थी। मैं ये जानती हूं कि एक बच्चे के जीवन में जो भूमिका मां निभा सकती है, वो कोई और नहीं।
स्मृति ईरानी
दमदार हस्ती- स्मृति ईरानी 2003 में 'क्योंकि सास भी कभी बहू थीÓ टीवी धारावाहिक में तुलसी विरानी की भूमिका के बाद मशहूर हो गई थीं। वे 2004 से राजनीति में सक्रिय हैं।
वे करीबी हैं- नरेंद्र मोदी की।
स्टाइल में भी आगे- पारंपरिक साड़ी पहनने की शौकीन स्मृति का पल्लू डालने का स्टाइल परदे के आगे और पीछे बदलता रहता है।
मां के रूप में- स्मृति कहती हैं कि हर संडे बच्चों को समय दे पाना या घर में रहना मेरे लिए मुश्किल होता है लेकिन जब भी वक्त मिलता है मैं उसी दिन को संडे मानकर बच्चों के साथ वक्त बिताती हूं। अपने फार्म हाउस जाकर उनके साथ केरम खेलना या मिलकर किसी पुरानी साड़ी से टेंट बनाना उनकी खुशी में रंग जाने जैसा होता है।

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013


ब्रेक तो बनता है


भारत के अरबपति अगर काम के मामले में कोई समझौता नहीं करते तो उनकी यही हालत आराम के मामले में भी होती है। अतिव्यस्त दिनचर्या के बाद जब बात काम से ब्रेक लेने की होती है तो वे दुनिया की सैर पर चल पड़ते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि उनके आरामगाह भी उन्हीं की तरह खास होते हैं...

लिक्वर बेरोन विजय माल्या उनकी आकर्षक जीवनशैली के लिए मशहूर हैं। याच के प्रति उनका पे्रम जगजाहिर है। उन्हें आराम के लिए फ्रांस स्थित फ्रेंच रिवेरा जाना पसंद है। क्रूज और याच के लिए फ्रांस के इस क्षेत्र को उपयुक्त माना जाता है। बेशुमार दौलत के मालिक इन अरबपतियों में से किसी को समुद्र के किनारे छुट्टियां बिताना रास आता है तो किसी को वन्य जीवों के बीच वक्त बिताना अच्छा लगता है। दक्षिण अफ्रीका के क्रूगर नेशनल पार्क में वन्य जीवों के बीच सुकून तलाशना भारत के बिलियोनेयर मुकेश अंबानी को खूब भाता है। वे सन् 2000 में अपने परिवार के साथ यहां छुट्टियां मनाने गए थे। उसके बाद 2010 में अनिल अंबानी ने परिवार के साथ यहां वक्त बिताया। इस नेशनल पार्क की ताजी हवा और लक्जरी उन्हें खूब रास आती है। इस नेशनल पार्क में ऐसे कई वन्य जीव देखने को मिलते हैं जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। इन जानवरों को शिकारियों से बचाने के लिए कू्रगर नेशनल पार्क का निर्माण किया गया है। साथ ही लक्जरी टेंट युक्त अर्नेस्ट हेमिंग्वे में ठहरने का आनंद लिया जा सकता है। यहां स्थित प्राइवेट लॉज में जकूजी की सुविधा भी उपलब्ध है। काम के बीच अगर कुछ वक्त आराम को दिया जाए तो काम की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। आदित्य बिरला गु्रप के चेयरमैन कुमार बिड़ला इस बात को अच्छी तरह समझते हैं। तभी तो वे हर साल दस दिन की छुट्टियां लंदन या सेंट मोरिट्ज में बिताते हैं। हसीन वादियों के बीच बसे बेहद खूबसूरत सेंट मोरिट्ज के बारे में कहा जाता है कि यहां 322 दिन में एक बार मुश्किल से धूप निकलती है। सुहाने मौसम की वजह से शाही परिवारों को यहां ठहरना खूब भाता है। स्विट्जरलैंड की इंगेडियन घाटी में सेंट मोरिट्स के नाम से बेहद खूबसूरत रिसोर्ट बनाया गया है। यहां आने वाले मेहमानों को कई रोमांचक गतिविधियों में भाग लेने का मौका मिलता है। इस जगह का अल्पाइन गेटवे दुनिया भर के अरबपतियों की मनपसंद जगह है। आदित्य बिड़ला अपनी पत्नी नीरजा के साथ कई बार नए साल का जश्न मनाने लंदन पहुंचते हैं। गोदरेज समूह के चेयरमैन आदि गोदरेज जितनी
गंभीरता से अपने बिजनेस को संभालते हैं उसी गंभीरता से घूमने के लिए उपयुक्त शहरों का चयन भी करते हैं। उन्हें घूमने-फिरने और अपनी फिटनेस को बनाए रखने का बेहद शौक है। उन्हें दक्षिण अफ्रीका के सिंगिता लॉज गेम पार्क और इटली के अमाल्फी कोस्ट जाना अच्छा लगता है। अमाल्फी कोस्ट पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां की रहस्यमय गुफाएं देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ जमा रहती है। यहां मौजूद चट्टानों और चमकदार खाडिय़ों का सौंदय देखते ही बनता है। ये तो रही साल के दूसरे दिनों की बात लेकिन जब मौका नए साल का जश्न मनाने का हो तो इन्हें याद आती है गोवा के समुद्र तटों की। वे अपनी पत्नी परमेश्वर के साथ गोवा के समुद्र तट पर नए साल की पार्टी का आनंद लेने निकल पड़ते हैं। स्टील टायकून के नाम से प्रसिद्ध लक्ष्मी मित्तल को अपने आराम के लिए ऐसे घर की तलाश थी, जहां पहुंचने के बाद उन्हें तरोताजा होने के लिए कहीं और न जाना पड़े। शायद इसीलिए उन्होंने लंदन में 18-19 केनसिंगटन पैलेस गार्डन को 128 मिलियन डॉलर देकर खरीदा। ये जगह छुट्टी मनाने के लिए उन्हें विशेष तौर पर पसंद है। दुनिया भर के तमाम ऐशोआराम के सारे साजो सामान के साथ इस बंगले में 12 बेडरूम और एक इंडोर पुल है। टर्किश स्टाइल वाले बाथरूम और 20 कारों की पार्किंग वाला यह घर अपने आप में किसी पर्यटक स्थल से कम नहीं है। उन्होंने एक घर स्विट्जरलैंड के सेंट मोरिट्ज में भी खरीदा है। लक्ष्मी निवास मित्तल की तरह सेंट मोरिट्ज बजाज गु्रप के चेयरमैन राहुल बजाज के मनपसंद स्थानों में से एक है। आसमान को छूते हुए एक से बढ़कर एक रिसोर्ट इस शहर की शान माने जाते हैं। वीकेंड का आनंद सभी अपने विशिष्ट अंदाज में लेते हैं। एस्सास समूह के निदेशक शशि और रवि रूजा फ्रांस के दक्षिणी क्षेत्र में छुट्टियां बिताते हैं। लंदन और मुंबई में उनके घर भी हैैं। कभी-कभी वे गुजरात में उनके फार्म हाउस भी चले जाते हैं। इस दौरान प्रॉन खाना उन्हें पसंद है।
रेमंड ग्रुप के हेड विजयपत सिंघानिया घूमने-फिरने की नई-नई जगह तलाशते रहते हैं। वे चाहे कहीं भी चले जाएं लेकिन लंदन की खूबसूरती उन्हें हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती  है। बजाज ऑटो के चेयरमैन राहुल बजाज को सेंट मोरिट्स के अलावा इंटरलाकेन छुट्टियां बिताने के लिए सबसे ज्यादा पसंद आता है। स्विट्जरलैंड के इस खूबसूरत शहर में हर साल लाखों पर्यटक छुट्टियां बिताने आते हैं। रतन टाटा के उत्तराधिकारी सायरस मिस्त्री अपने प्राइवेट जेट से यूरोप की यात्रा पर जाना पसंद करते हैं। सामाजिक समारोह में बहुत कम जाने वाले सायरस मिस्त्री का पूना स्थित फार्म हाउस 200 एकड़ में फैला हुआ है। उन्हें घुड़सवारी करने का बेहद शौक है। अपने इस शौक को वे इसी फार्म हाउस में पूरा करते हैं।


आईपीएल में लगा स्टाइल का सिक्सर 


ग्लैमरस स्पोर्टिंग इवेंट के नाम से अपनी खास पहचान रखने वाले आईपीएल खेलों में स्टाइलिश क्रिकेट खिलाडिय़ों की हर अदा देखते ही बनती है। भारतीय टीम के स्टाइलिश क्रिकेटर्स में सबसे आगे हैं विराट कोहली। वे स्टाइल के साथ-साथ सुविधा का भी पूरा ख्याल रखते हैं। वे अक्सर कैजुअल वियर को खास अंदाज में पहने हुए नजर आते हैं। औपचारिक अवसरों पर ब्लैक जींस के साथ व्हाइट और ब्लैक शर्ट पहने हुए उन्हें देखा जा सकता है। उनके चेहरे पर बिखरी हल्की सी मुस्कान दर्शकों को उनकी ओर आकर्षित करती है। अपने लुक्स के साथ अगर कोई नए-नए प्रयोग करता नजर आता है तो वो हैं महेंद्र सिंह धोनी और सचिन तेंदुलकर। अक्सर वे गहरे रंगों वाले टी शट्र्स पहनना पसंद करते हैं। उसके बाद बारी आती है जहीर खान की। वे उन क्रिकेटर्स में से एक हैं जो मौसम के अनुसार अपनी स्टाइल और कपड़ों को बदलने का शौक रखते हैं। वे सूट के अलावा लिनेन की ट्राउजर और जींस में भी आरामदायक महसूस करते हैं। उन्हें नाइक  के टी शट्र्स और जैकेट्स के साथ जींस पहनना पसंद है। औपचारिक अवसरों के लिए वे अपने खास टेलर से ही कपड़े सिलवाना पसंद करते हैं। दूसरों से अलग शॉन टैट भारतीय मॉडल्स के लिए प्रेरणादायी हैं। ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर्स शॉन की चर्चा उस समय भी थी जब पिछले साल उन्होंने रैंप पर कैट वॉक किया था। पार्टी में वे क्लासिक और क्रिकेट की प्रेक्टिस के दौरान कैजुअल वियर पहने दिखाई देते हैं। चेहरे पर हल्की सी मुस्कान और सेक्सी हेयर स्टाइल वाले माइकल क्लार्क की स्टाइल युवाओं में देखते ही बनती है। लुक्स के मामले में सबसे ज्यादा स्कोर पाने वाले माइकल फैशन में इन रहने के लिए अपने वार्डरोब को बदलने की कला भी जानते हैं। उन्हें सबसे अच्छे कपड़े पहनने वाला और सबसे फैशनेबल क्रिकेटर्स के तौर पर देखा जाता है। दुर्भाग्य से चोट लगने की वजह से केविन पीटरसन की तरह वे भी इस बार आईपीएल में नजर नहीं आएंगे। फैशन को लेकर उनका कहना है कि युवाओं को अपने लिए उपयुक्त कपड़ों का चयन करने से ज्यादा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जो कपड़े वो पहन रहे हैं उसे किस तरह पहना जा रहा है। युवाओं के बीच जिस क्रिकेटर का स्टाइल छाया रहता है, उनमें सुरेश रैना का नाम शामिल है। सुरेश के कूल स्टाइल को परफेक्ट बनाए रखने में उनके वार्डरोब का सबसे बड़ा हाथ है। सुरेश को फैशनेबल कपड़े खरीदना और पहनना अच्छा लगता है। एक से बढ़कर एक स्टाइलिश क्रिकेटर की लिस्ट में ब्रेट ली किसी से कम नहीं हैं। उनकी रॉकस्टार स्टाइल को देखते ही युवा उन पर फिदा हुए बिना नहीं रहते। लड़कियों के चहेते इस खिलाड़ी को कैजुअल वियर पहनना पसंद है। इस तरह के कपड़ों को ट्रेडिशनल टच के साथ पहनना वे जानते हैं। एक समय वो था जब युवराज सिंह का नाम कई बॉलीवुड अभिनेत्रियों के साथ जुड़ा। उन्हीं दिनों से युवराज अपने लुक्स और ड्रेसेस को लेकर सजग रहते हैं। बात चाहे प्रमोशनल इवेंट्स की हो या स्क्रीनिंग की, वे कैजुअल वियर के साथ स्मार्ट दिखने की कला जानते हैं। हॉटेस्ट क्रिकेटर्स के रूप में केविन पीटरसन की शैली सबसे अलग है। युवाओं में उनकी सेक्सी हेयर स्टाइल 'मोहाकÓ छाई रहती है। राहुल द्रविड़ उन खिलाडिय़ों में से एक हैं जिनके वार्डरोब में सोबर कपड़ों की भरमार है। स्टाइल के मामले में राहुल दूसरे खिलाडिय़ों से पीछे ही सही पर वे स्मार्ट ड्रेसिंग और जेंटल लुक की वजह से दर्शकों के चहेते खिलाड़ी बने रहते हैं। फैशनेबल बने रहना सबके लिए आसान नहीं रहता। ये बात अगर इरफान पठान के लिए कही जाए तो गलत नहीं होगा। इरफान फैशन से अलग सुविधायुक्त टी शट्र्स और ट्राउजर्स पहनने को तरजीह देते हैं। ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर  ग्लैन मैक्सवेल  ट्रेंडी लुक को अपने लिए उपयुक्त नहीं मानते।
- ईसा बेल लेटी विराट कोहली की गर्लफ्रेंड हैं। फिलहाल वे मॉडल हैं और जल्दी ही बॉलीवुड फिल्मों में नजर आने की तैयारी कर रही हैं।
 -शिखर धवन की पत्नी आयशा मुखर्जी कुशल बॉक्सर होने के साथ ही दो बेटियों की मां हैं। मां बनने के बाद भी फैशन के प्रति उनकी समझ उनके पहनावे में झलकती है।
 -सांवली सलोनी और खूूबसूरत बालों वाली शेमोन जार्दिम जैक्स केलिस के दिल पर राज करती हैं। शेमोन इस हसीन मॉडल के साथ पिछले पांच सालों से डेटिंग कर रहे हैं।
- ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिशेल जॉनसन की पत्नी जेसिका बेटिच जॉनसन कराटे चैंपियन होने के साथ ही सक्सेसफुल डिजाइनर के तौर पर जानी जाती हैं।
- शेन वॉटसन की प्रेमिका ली फर लॉन्ग को नंबर वन वेग्स के नाम से जाना जाता है। इस मामले में उन्होंने विक्टोरिया बेकहम को भी पीछे छोड़ दिया है।
- जेनी किट्जमेन डेल स्टेन की पत्नी, साउथ अफ्रीका की मॉडल और अभिनेत्री हैं। स्टाइलिश क्रिकेट वेग्स की श्रेणी में जेनी किसी से कम नहीं हैं।
-ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम कप्तान क्लार्क की पत्नी काइली मॉडल और प्रेजेंटर हैं। बहुमुखी प्रतिभा की धनी काइली शियर कवर मेकअप की ब्रांड एंबेसेडर हैं। वे गाउन से लेकर शाट्र्स हर तरह की ड्रेस में अपने स्टाइल को बनाए रखना जानती हैं।

शनिवार, 2 मार्च 2013


हक की बात
हक के साथ



देशभर में महिला अधिकारों की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है। सच्चाई यह भी है कि देश की अधिकांश महिलाओं को सही मायनों में उनके अधिकारों की जानकारी ही नहीं है। एक ओर अगर हम उनकी सुरक्षा को लेकर आज नए अधिकारों की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि जो अधिकार उन्हें प्राप्त हैं, सबसे पहले वे उन अधिकारों के प्रति जागरूक हों....

सामाजिक तौर पर महिलाओं को त्याग, सहनशीलता व शर्मीलेपन का ताज पहनाया
जाता है, जिसके बोझ से दबी महिला कई बार जानकारी होते हुए भी अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाती। बहुत से मामलों में महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उनके साथ हो रही घटनाएं हिंसा हैं और इससे बचाव के लिए कोई कानून भी है। आमतौर पर शारीरिक प्रताडऩा यानी मारपीट, जान से मारना आदि को ही हिंसा माना जाता है और इसके लिए रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाती है।
इसके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 498 के तहत ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा की गई क्रूरता, जिसके अंतर्गत मारपीट से लेकर कैद में रखना, खाना न देना व दहेज के लिए प्रताडि़त करना आदि आता है, के तहत अपराधियों को 3 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है, पर शारीरिक प्रताडऩा की तुलना में महिलाओं के साथ मानसिक प्रताडऩा के केस ज्यादा होते हैं।
इस तकलीफ को आमतौर पर एक सीमा तक महिलाएं बर्दाश्त करती हैं, क्योंकि परंपरा के नाम पर बचपन से वे यह सहती रहती हैं, लेकिन घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 इन स्थितियों में भी महिला की मदद करता है। इस बारे में अधिवक्ता इंदिरा शुक्ला कहती हैं कि यह धारा महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो उन्हें दुर्गा का रूप प्रदान करती है। खास बात यह है कि घरेलू हिंसा अधिनियम में सभी महिलाओं के अधिकार की रक्षा की संभावना है। इसके तहत विवाहित महिला के साथ-साथ अविवाहित, विधवा, बगैर शादी के साथ रहने वाली महिला, दूसरी पत्नी के तौर पर रहने वाली महिला व 18 वर्ष से कम उम्र के लड़की व लड़का सभी को संरक्षण देने का प्रयास किया गया है। इस कानून में घर में रहने का अधिकार, संरक्षण, बच्चों की कस्टडी व भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार महिलाओं को मिलता है, जो किसी और कानून में संभव नहीं है।
इतनी सुविधाओं के बावजूद अगर कहीं कमी है तो महिलाओं के जागरूक होने में है। इस समय उन्हें उनके हितों का ध्यान रखते हुए जो अधिकार मिले हैं, वो पर्याप्त हैं। इन अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए वर्कशॉप का आयोजन होना चाहिए। इसका लाभ अधिक से अधिक महिलाओं को मिलेगा। कुछ महिलाएं अगर इन अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहती भी हैं तो कभी भावनात्मक संबंध सामने आ जाते हैं तो कभी समाज में अपमानित होने की वजह से वे आवाज उठाने से डरती हैं। उनके अपने डर की वजह से ही उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। अगर बात आज के परिदृश्य में की जाए तो उन महिलाओं की कमी नहीं जो आसमान छू रही हैं पर यह भी सच है कि महिलाओं व लड़कियों के साथ होने वाली हिंसा भी सीमा से आगे बढ़ रही है। हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ अधिकार लेकर आता है चाहे वह जीने का अधिकार हो या विकास के लिए अवसर प्राप्त करने का, परंतु इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर किए जा रहे भेदभाव की वजह से महिलाएं इन अधिकारों से वंचित रह जाती हैं। इसी विचार के चलते महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु हमारे संविधान में अलग से कानून बनाए गए हैं या समय-समय पर इनमें संशोधन किया गया है। इन अधिकारों की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना भी अब आसान है। इस बारे में अधिवक्ता संतोष मालवीय कहते हैं कि महिला अधिकारों को लेकर प्रशासन ने कुछ किताबें जारी की हैं। इन किताबों में महिलाओं के अधिकार सहित महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग और अदालत संबंधी सारी जानकारी उपलब्ध है। इन किताबों को हर महिला को पढऩा चाहिए। इस बारे में आपस में एक-दूसरे से बातचीत करने पर कानून संबंधी सारी जानकारी मिलना मुश्किल है लेकिन अपने अधिकारों को जानने के लिए ये किताबें हर महिला की मददगार साबित हो सकती हैं।

हिम्मत की कमी है
महिला अधिकारों के बारे में अगर किसी अशिक्षित महिला को जानकारी नहीं है तो बात समझ में आती है लेकिन अगर शिक्षित महिलाएं इस बारे में सजग नहीं हैं तो यह स्थिति दुखद है। मैंने यह भी देखा है कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी तो है लेकिन उनमें हिम्मत की कमी है। कई बार सामाजिक और पारिवारिक मजबूरियों की वजह से वे जुर्म सहती रहती हैं। मैं कहना चाहूंगी कि अब तक आपने बहुत धीरज रखा लेकिन अब वक्त आ गया है जब चुप रहकर नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को पाकर आगे बढ़ें।
उपमा रॉय
अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग


समीक्षा भी जरूरी है
एक बार फिर यह खबर है कि इस साल महिला दिवस पर मुख्यमंत्री महिलाओं के लिए नई योजनाओं की घोषणा करेंगे लेकिन पिछले साल जिन योजनाओं की घोषणा की गई थी, उनके परिणामों की जानकारी किसी को नहीं है। अभी जरूरत नई योजनाओं को लागू करने के साथ ही इस बात की भी है कि पिछले साल की योजनाओं की समीक्षा हो। ये सारी बातें सिर्फ कागजों तक ही सीमित क्यों हैं?
रोली शिवहरे
सामाजिक कार्यकर्ता


प्रयास अपने स्तर पर हो
एक महिला को उसके अधिकारों के बारे में जानकारी देने का काम आसपास की महिलाओं को अपने स्तर पर करना चाहिए। अगर हम किसी को परेशानी में देखते भी हैं तो यह उसकी समस्या है, बस इतना सोचकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जब तक ये मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक परेशानी बनी रहेगी।
दीप्ति सिंह
सचिव, म.प्र. कांग्रेस कमेटी, अध्यक्ष, प्रियदर्शनी संस्था


महिलाओं को मिले अधिकार
- घरेलू हिंसा के खिलाफ
- दहेजी विरोधी कानून
- प्लांटेशन लेबर एक्ट
- संपत्ति में बराबर का अधिकार
- वेतन में बराबरी का अधिकार
- मातृत्व लाभ कानून
- स्पेशल मैरिज एक्ट
- सती विरोधी कानून
- गर्भपात कानून

लंबा हुआ इनका इंतजार
- महिला आरक्षण बिल
बिल में महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने की बात है लेकिन इस बिल का शुरू से ही विरोध हो रहा है। राज्यसभा ने इस बिल को 9 मार्च को पारित किया था, परंतु लोकसभा में अब तक इस पर वोटिंग नहीं हुई है। लोकसभा में पेश करने पर सपा इस बिल को फाड़ चुकी है। तब से यह बिल दोबारा लोकसभा में नहीं आया है।
- हिंदू विवाह कानून संशोधन बिल, 2012
इस कानून में तलाक को आसान बनाने के प्रावधान किए गए हैं। इसमें दोनों पक्ष तलाक के लिए राजी होने की स्थिति में महिला के  लिए आसान शर्तें रखी गई हैं लेकिन यह बिल भी संसद में लंबित है।
- कार्यस्थलों पर यौन उत्पीडऩ रोकथाम बिल
यह बिल कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल मुहैया करवाने के लिए लाया गया था।
- अश्लील चित्रण रोकथाम संशोधन बिल 2012
बिल में टीवी, अखबार और विज्ञापनों में महिलाओं को वस्तु की तरह परोसने की रोकथाम करने से संबंधित है। यह बिल मानसून सत्र 2012 में राज्यसभा में पेश हो चुका है।
- आपराधिक कानून संशोधन बिल 2012
यह बिल भी संसद में लंबित है। इसमें रेप तथा यौन हमलों को रोकने के प्रावधान हैं। इसके अंतर्गत यौन हमलों की शिकायत अब पुरुष भी कर सकते हैं।
- राजीव गांधी नेशनल क्रेच स्कीम फॉर दि चिल्ड्रन ऑफ वर्किंग मदर

दुनिया के मुकाबले कहां हैं भारत की महिलाएं
- शिशु मृत्यु दर (प्रति एक हजार जन्म पर) भारत में 73 प्रतिशत और दुनिया में 60 प्रतिशत
- मातृ मृत्यु दर (प्रति एक लाख जन्म पर) 570 प्रतिशत और दुनिया में 430 प्रतिशत
- महिला साक्षरता 58 प्रतिशत और 77.6 प्रतिशत
- विद्यालयों में बालिकाओं का पंजीकरण भारत में 47 प्रतिशत और दुनिया में 62 प्रतिशत
- महिलाओं की कमाई भारत में 26 प्रतिशत और 58 प्रतिशत
- सामान्य से कम वजन के बच्चे भारत में 53 प्रतिशत और 30 प्रतिशत
 - कुल जन्म दर भारत में 3.2 प्रतिशत और दुनिया में 2.9 प्रतिशत
- जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे भारत में 33 प्रतिशत और दुनिया में 17 प्रतिशत

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

स्वस्थ रहें
मस्त रहें
केन सपोर्ट संस्था के द्वारा घोषित आंकड़ों के अनुसार आज भारत में ढाई करोड़ लोग कैंसर के मरीज हैं और लगभग एक लाख कैंसर के मरीज हर साल बढऩे से कैंसर से पीडि़तोंं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी कैंसर को लेकर समाज में कई भ्रांतियां फैली हैं। लोगों में जागरूकता अभी भी कम है जिसकी वजह से कई बार रोगी इस रोग की गंभीरता को समझ ही नहीं पाते। सही समय पर और सही डॉक्टर की देखरेख से कैंसर का इलाज संभव है। इस भयावह बीमारी के बारे में हमने बात की शहर के प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञों से और जाने उनके अनुभव कुछ इस तरह...

इलाज संभव है
डॉ. श्याम अग्रवाल
कैंसर रोग विशेषज्ञ
डायरेक्टर, नवोदय कैंसर हॉस्पिटल
अगर शरीर में असामान्य लक्षण जैसे मुंह कम खुल रहा हो, खांसी में खून, पेशाब या मल-मूत्र में खून हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि ये सारे कैंसर के लक्षण हैं। लोग यह जानते हैं कि ये सारे कैंसर के लक्षण हैं, लेकिन फिर भी शरीर में असामान्य लक्षण दिखने पर लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे रोग बढ़ जाता है। आश्चर्य तो इस बात का है कि सिगरेट और शराब के विज्ञापन से लेकर इन्हें बेचने वाली दुकानों पर वैधानिक चेतावनी भी लिखी होती है। उसके बाद भी लोग नहीं समझते और दूसरों की देखादेखी इस नेश का सेवन करते रहते हैं। स्कूलों के आसपास 100 मीटर तक तंबाकू की दुकान प्रतिबंधित है। यहां तक कि 18 साल से कम उम्र के व्यक्तियों को तंबाकू या गुटखा बेचने पर भी पाबंदी है। इसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने वालों को 200 रुपए जुर्माने का भी प्रावधान है लेकिन ये सारे नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। इन नियमों की अनदेखी करते हुए अधिकांश गुटखे की दुकानें स्कूलों के आसपास बनी हुई है जहां से विद्यार्थी इन्हें खरीदकर कम उम्र में ही इस नशे के आदी हो जाते हैं। इसी तरह हमारे देश में सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने वालों को 200 रुपए जुर्माने की सजा का प्रावधान है लेकिन इन स्थानों पर सिगरेट पीना आम है जिसे कोई रोकने वाला नहीं है। अगर हम विदेशों की बात करें तो वहां सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने पर 25000 जुर्माना लगता है इसलिए ऐसे स्थानों पर लोग धूम्रपान करने से डरते हैं लेकिन हमारे देश में अगर कहीं कोई व्यक्ति पकड़ा भी जाता है तो उसे ये मालूम है कि वह 200 रुपए देकर छूट जाएगा। कई सेलिब्रिटी कैंसर का इलाज विदेशों में करवा रहे हैं, जिससे आम लोगों को यह लगता है कि यहां कैंसर की सुविधाएं वहां से कम हैं, जबकि ऐसा नहीं है। जो इलाज युवराज सिंह को विदेशों में मिल रहा है वो कई साल पहले क्रिकेटर जे पी यादव को मैंने यहीं रहते हुए दिया था जिसकी वजह से वे आज भी स्वस्थ हैं और अभी तक क्रिकेट खेल रहे हैं। कुछ समय पहले एक युवती मेरे पास आई थी जिसके एक फेफड़े में पानी भर गया था। उसके बचने की उम्मीद कम थी लेकिन लगातार कुछ महीनों तक इलाज के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।

याद रखें
- कैंसर का इलाज संभव है इसलिए इसे लाइलाज बीमारी समझने की भूल न करें।
- इलाज के दौरान अपने दिमाग का इस्तेमाल करने के बजाय डॉक्टर की राय मानें।

जीवन शैली बदलें
डॉ. सुनील कुमार
डी.एम. मेडिकल ओंकोलॉजिस्ट
जवाहर लाल नेहरू, कैंसर हॉस्पिटल

भोपाल में कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज मुंह के कैंसर के हैं। महिलाओं में गर्भाशय और बच्चेदानी का कैंसर सबसे ज्यादा हो रहा है। लोगों की अनियमित दिनचर्या और खान-पान की गलत आदतों का असर जानलेवा बीमारियों जैसे कैंसर के रूप में सामने आ रहा है। देर से शादी होने और डिलीवरी के बाद बच्चों को स्तनपान न करवाने की वजह से स्तन कैंसर का खतरा महिलाओं को ज्यादा रहता है। आजकल महिलाओं में सिगरेट और शराब पीने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है जो कैंसर के फैलने का मुख्य कारण होता है। इस समय सबसे ज्यादा कैंसर 30 से 60 साल के व्यक्तियों को हो रहा है। इसी उम्र के लोगों पर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में अगर लोग अपने सेहत की परवाह न करते हुए इस रोग के प्रति सतर्क नहीं रहते हैं तो पूरा परिवार इस गलती का खामियाजा भुगतता है। बच्चों में लिम्फोमा, ल्यूकेमिया और ब्रेन कैंसर अधिक हो रहा है। इसका मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान बार-बार एक्सरे होना या गलत दवाओं का इस्तेमाल होता है। बच्चे के जन्म के बाद भी अगर उसे बार-बार वायरल इंफेक्शन होता है तो कैंसर होने की संभावना अधिक रहती है।
बरतें सावधानी
- इसका इलाज लंबे समय तक चलता है। इस दौरान मरीजों को धैर्य बनाए रखते हुए सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए।                         
- महिलाओं को गर्भाशय और बच्चेदानी के कैंसर से बचने के लिए पेप्समियर टेस्ट करवाएं।  सरवाइकल कैंसर और हेपेटाइटिस बी से बचने के लिए वैक्सीन बाजार में उपलब्ध है, इन्हें जरूर लगवाएं।

डॉ. प्रशांत कुमार जैन
कैंसर सर्जन
चिरायु हॉस्पिटल
रोबोट पद्धति वरदान है
कैंसर के लिए बनाई गई आधुनिक टारगेटेड थेरेपी के द्वारा बिना किसी साइड इफेक्ट के इलाज संभव है। इसके अलावा कीमोथेरेपी, रेडिएशन, आईएमआरटी और इम्युनोथेरेपी के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है। कैंसर के रोगियों के लिए रोबोट पद्धति वरदान साबित हो रही है। इस रोग से बचने के लिए सबसे पहले समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना होगा। मेरे पास जो मरीज आते हैं, उनमें से कुछ का यह कहना है कि भोपाल के पानी में कैल्शियम की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए वे तंबाकू के साथ चूना खाते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। हमारे देश में लोगों का किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए देसी दवाएं लेने पर अटूट विश्वास है जिसकी वजह से बीमारी बढऩे का खतरा बना रहता है। मैंने अपनी टीम के साथ 6 महीने से लेकर 86 साल तक के मरीजों के कैंसर को ठीक किया है। एक महिला के मुंह से 13 किलो का ट्यूमर निकाला और उसका सफल इलाज भी किया। इसी तरह एक दूसरे केस में किडनी के ट्यूमर को ठीक किया।

मेरी सलाह है
- इस रोग से बचने के लिए प्रशासन कई सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। कई अस्पतालों में मुफ्त इलाज उपलब्ध है। इन सुविधाओं का फायदा अवश्य उठाएं।
- कैंसर का इलाज किसी कैंसर विशेषज्ञ की देखरेख में ही करवाएं। हमारे देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो कैंसर जैसी भयावह बीमारी का इलाज भी विशेषज्ञों की राय के बिना करवाते रहते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि तमाम कोशिशों के बाद भी कैंसर के बारे में जागरूकता की कमी है।

मृत्युदर में कमी आई है
डॉ. टी पी साहू
कैंसर रोग विशेषज्ञ
विभागाध्यक्ष, चिरायु मेडिकल कॉलेज
पहले कैंसर होने पर जिस अंग में कैंसर है उसे शरीर से अलग कर दिया जाता था लेकिन अब आधुनिक तकनीकी की वजह से क्षतिग्रस्त अंग को बचाने पर जोर दिया जाता है। इस तकनीकी की वजह से कैंसर के मरीजों की मृत्युदर में कमी आई है। मेरे पास आष्टा से एक मरीज आया था जिसे फेफड़ों का कैंसर और टीबी दोनों थे। वो वेंटिलेटर पर था। चार महीने तक उसका इलाज जारी रहा। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है। इस बीमारी से बचने के लिए सिर्फ कैंसर विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि कैंसर के रोगी के लिए मनोवैज्ञानिक, आहार विशेषज्ञ, सलाहकार और फिजियोथेरेपिस्ट सभी को काम करना होगा।
एहतियात बरतें जैसे-
- कैंसर पूरी तरह से ठीक होने के बाद भी मरीज को इस डिप्रेशन से बाहर आने के लिए मनोवैज्ञानिक से राय लेना चाहिए।
- साइबरनाइस और रेडियो थेरेपी के माध्यम से कैंसर को जड़ से खत्म किया जा सकता है इसलिए इस बीमारी का पता चलने पर हिम्मत न हारें, बल्कि हिम्मत के साथ इलाज करवाने पर ध्यान दें।
भ्रांतियों को मिटाएं
डॉ. रवि गुप्ता
कैंसर सर्जन
डायरेक्टर, लेक सिटी हॉस्पिटल
अगर मुंह में छाले हों, लंबे समय तक खांसी या बुखार आए और शरीर के किसी भी अंग से असामान्य रक्तस्राव हो तो इन्हें कैंसर के लक्षण समझते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कई लोग यह मानते हैं कि कैंसर का इलाज बहुत महंगा है, जबकि ऐसा नहीं है। कुछ लोगों को लगता है कि बायोप्सी होने से कैंसर सारे शरीर में फैल जाता है और इसलिए वे बायोप्सी करवाना नहीं चाहते, जबकि बायोप्सी इसलिए की जाती है ताकि क्षतिग्रस्त ऊतकों को फैलने से रोका जा सके।

याद रखें
- कैंसर के मरीज के साथ रहने से अन्य व्यक्ति को भी कैंसर हो जाता है, जैसी भ्रांतियां दिमाग से निकाल दें।
- लोगों की कही बात पर विश्वास करने के बजाय कैंसर रोग विशेषज्ञ पर विश्वास करें और उसी के अनुसार उचित इलाज करवाएं।