शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013


ब्रेक तो बनता है


भारत के अरबपति अगर काम के मामले में कोई समझौता नहीं करते तो उनकी यही हालत आराम के मामले में भी होती है। अतिव्यस्त दिनचर्या के बाद जब बात काम से ब्रेक लेने की होती है तो वे दुनिया की सैर पर चल पड़ते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि उनके आरामगाह भी उन्हीं की तरह खास होते हैं...

लिक्वर बेरोन विजय माल्या उनकी आकर्षक जीवनशैली के लिए मशहूर हैं। याच के प्रति उनका पे्रम जगजाहिर है। उन्हें आराम के लिए फ्रांस स्थित फ्रेंच रिवेरा जाना पसंद है। क्रूज और याच के लिए फ्रांस के इस क्षेत्र को उपयुक्त माना जाता है। बेशुमार दौलत के मालिक इन अरबपतियों में से किसी को समुद्र के किनारे छुट्टियां बिताना रास आता है तो किसी को वन्य जीवों के बीच वक्त बिताना अच्छा लगता है। दक्षिण अफ्रीका के क्रूगर नेशनल पार्क में वन्य जीवों के बीच सुकून तलाशना भारत के बिलियोनेयर मुकेश अंबानी को खूब भाता है। वे सन् 2000 में अपने परिवार के साथ यहां छुट्टियां मनाने गए थे। उसके बाद 2010 में अनिल अंबानी ने परिवार के साथ यहां वक्त बिताया। इस नेशनल पार्क की ताजी हवा और लक्जरी उन्हें खूब रास आती है। इस नेशनल पार्क में ऐसे कई वन्य जीव देखने को मिलते हैं जो विलुप्त होने की कगार पर हैं। इन जानवरों को शिकारियों से बचाने के लिए कू्रगर नेशनल पार्क का निर्माण किया गया है। साथ ही लक्जरी टेंट युक्त अर्नेस्ट हेमिंग्वे में ठहरने का आनंद लिया जा सकता है। यहां स्थित प्राइवेट लॉज में जकूजी की सुविधा भी उपलब्ध है। काम के बीच अगर कुछ वक्त आराम को दिया जाए तो काम की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। आदित्य बिरला गु्रप के चेयरमैन कुमार बिड़ला इस बात को अच्छी तरह समझते हैं। तभी तो वे हर साल दस दिन की छुट्टियां लंदन या सेंट मोरिट्ज में बिताते हैं। हसीन वादियों के बीच बसे बेहद खूबसूरत सेंट मोरिट्ज के बारे में कहा जाता है कि यहां 322 दिन में एक बार मुश्किल से धूप निकलती है। सुहाने मौसम की वजह से शाही परिवारों को यहां ठहरना खूब भाता है। स्विट्जरलैंड की इंगेडियन घाटी में सेंट मोरिट्स के नाम से बेहद खूबसूरत रिसोर्ट बनाया गया है। यहां आने वाले मेहमानों को कई रोमांचक गतिविधियों में भाग लेने का मौका मिलता है। इस जगह का अल्पाइन गेटवे दुनिया भर के अरबपतियों की मनपसंद जगह है। आदित्य बिड़ला अपनी पत्नी नीरजा के साथ कई बार नए साल का जश्न मनाने लंदन पहुंचते हैं। गोदरेज समूह के चेयरमैन आदि गोदरेज जितनी
गंभीरता से अपने बिजनेस को संभालते हैं उसी गंभीरता से घूमने के लिए उपयुक्त शहरों का चयन भी करते हैं। उन्हें घूमने-फिरने और अपनी फिटनेस को बनाए रखने का बेहद शौक है। उन्हें दक्षिण अफ्रीका के सिंगिता लॉज गेम पार्क और इटली के अमाल्फी कोस्ट जाना अच्छा लगता है। अमाल्फी कोस्ट पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां की रहस्यमय गुफाएं देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ जमा रहती है। यहां मौजूद चट्टानों और चमकदार खाडिय़ों का सौंदय देखते ही बनता है। ये तो रही साल के दूसरे दिनों की बात लेकिन जब मौका नए साल का जश्न मनाने का हो तो इन्हें याद आती है गोवा के समुद्र तटों की। वे अपनी पत्नी परमेश्वर के साथ गोवा के समुद्र तट पर नए साल की पार्टी का आनंद लेने निकल पड़ते हैं। स्टील टायकून के नाम से प्रसिद्ध लक्ष्मी मित्तल को अपने आराम के लिए ऐसे घर की तलाश थी, जहां पहुंचने के बाद उन्हें तरोताजा होने के लिए कहीं और न जाना पड़े। शायद इसीलिए उन्होंने लंदन में 18-19 केनसिंगटन पैलेस गार्डन को 128 मिलियन डॉलर देकर खरीदा। ये जगह छुट्टी मनाने के लिए उन्हें विशेष तौर पर पसंद है। दुनिया भर के तमाम ऐशोआराम के सारे साजो सामान के साथ इस बंगले में 12 बेडरूम और एक इंडोर पुल है। टर्किश स्टाइल वाले बाथरूम और 20 कारों की पार्किंग वाला यह घर अपने आप में किसी पर्यटक स्थल से कम नहीं है। उन्होंने एक घर स्विट्जरलैंड के सेंट मोरिट्ज में भी खरीदा है। लक्ष्मी निवास मित्तल की तरह सेंट मोरिट्ज बजाज गु्रप के चेयरमैन राहुल बजाज के मनपसंद स्थानों में से एक है। आसमान को छूते हुए एक से बढ़कर एक रिसोर्ट इस शहर की शान माने जाते हैं। वीकेंड का आनंद सभी अपने विशिष्ट अंदाज में लेते हैं। एस्सास समूह के निदेशक शशि और रवि रूजा फ्रांस के दक्षिणी क्षेत्र में छुट्टियां बिताते हैं। लंदन और मुंबई में उनके घर भी हैैं। कभी-कभी वे गुजरात में उनके फार्म हाउस भी चले जाते हैं। इस दौरान प्रॉन खाना उन्हें पसंद है।
रेमंड ग्रुप के हेड विजयपत सिंघानिया घूमने-फिरने की नई-नई जगह तलाशते रहते हैं। वे चाहे कहीं भी चले जाएं लेकिन लंदन की खूबसूरती उन्हें हमेशा अपनी ओर आकर्षित करती  है। बजाज ऑटो के चेयरमैन राहुल बजाज को सेंट मोरिट्स के अलावा इंटरलाकेन छुट्टियां बिताने के लिए सबसे ज्यादा पसंद आता है। स्विट्जरलैंड के इस खूबसूरत शहर में हर साल लाखों पर्यटक छुट्टियां बिताने आते हैं। रतन टाटा के उत्तराधिकारी सायरस मिस्त्री अपने प्राइवेट जेट से यूरोप की यात्रा पर जाना पसंद करते हैं। सामाजिक समारोह में बहुत कम जाने वाले सायरस मिस्त्री का पूना स्थित फार्म हाउस 200 एकड़ में फैला हुआ है। उन्हें घुड़सवारी करने का बेहद शौक है। अपने इस शौक को वे इसी फार्म हाउस में पूरा करते हैं।


आईपीएल में लगा स्टाइल का सिक्सर 


ग्लैमरस स्पोर्टिंग इवेंट के नाम से अपनी खास पहचान रखने वाले आईपीएल खेलों में स्टाइलिश क्रिकेट खिलाडिय़ों की हर अदा देखते ही बनती है। भारतीय टीम के स्टाइलिश क्रिकेटर्स में सबसे आगे हैं विराट कोहली। वे स्टाइल के साथ-साथ सुविधा का भी पूरा ख्याल रखते हैं। वे अक्सर कैजुअल वियर को खास अंदाज में पहने हुए नजर आते हैं। औपचारिक अवसरों पर ब्लैक जींस के साथ व्हाइट और ब्लैक शर्ट पहने हुए उन्हें देखा जा सकता है। उनके चेहरे पर बिखरी हल्की सी मुस्कान दर्शकों को उनकी ओर आकर्षित करती है। अपने लुक्स के साथ अगर कोई नए-नए प्रयोग करता नजर आता है तो वो हैं महेंद्र सिंह धोनी और सचिन तेंदुलकर। अक्सर वे गहरे रंगों वाले टी शट्र्स पहनना पसंद करते हैं। उसके बाद बारी आती है जहीर खान की। वे उन क्रिकेटर्स में से एक हैं जो मौसम के अनुसार अपनी स्टाइल और कपड़ों को बदलने का शौक रखते हैं। वे सूट के अलावा लिनेन की ट्राउजर और जींस में भी आरामदायक महसूस करते हैं। उन्हें नाइक  के टी शट्र्स और जैकेट्स के साथ जींस पहनना पसंद है। औपचारिक अवसरों के लिए वे अपने खास टेलर से ही कपड़े सिलवाना पसंद करते हैं। दूसरों से अलग शॉन टैट भारतीय मॉडल्स के लिए प्रेरणादायी हैं। ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर्स शॉन की चर्चा उस समय भी थी जब पिछले साल उन्होंने रैंप पर कैट वॉक किया था। पार्टी में वे क्लासिक और क्रिकेट की प्रेक्टिस के दौरान कैजुअल वियर पहने दिखाई देते हैं। चेहरे पर हल्की सी मुस्कान और सेक्सी हेयर स्टाइल वाले माइकल क्लार्क की स्टाइल युवाओं में देखते ही बनती है। लुक्स के मामले में सबसे ज्यादा स्कोर पाने वाले माइकल फैशन में इन रहने के लिए अपने वार्डरोब को बदलने की कला भी जानते हैं। उन्हें सबसे अच्छे कपड़े पहनने वाला और सबसे फैशनेबल क्रिकेटर्स के तौर पर देखा जाता है। दुर्भाग्य से चोट लगने की वजह से केविन पीटरसन की तरह वे भी इस बार आईपीएल में नजर नहीं आएंगे। फैशन को लेकर उनका कहना है कि युवाओं को अपने लिए उपयुक्त कपड़ों का चयन करने से ज्यादा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि जो कपड़े वो पहन रहे हैं उसे किस तरह पहना जा रहा है। युवाओं के बीच जिस क्रिकेटर का स्टाइल छाया रहता है, उनमें सुरेश रैना का नाम शामिल है। सुरेश के कूल स्टाइल को परफेक्ट बनाए रखने में उनके वार्डरोब का सबसे बड़ा हाथ है। सुरेश को फैशनेबल कपड़े खरीदना और पहनना अच्छा लगता है। एक से बढ़कर एक स्टाइलिश क्रिकेटर की लिस्ट में ब्रेट ली किसी से कम नहीं हैं। उनकी रॉकस्टार स्टाइल को देखते ही युवा उन पर फिदा हुए बिना नहीं रहते। लड़कियों के चहेते इस खिलाड़ी को कैजुअल वियर पहनना पसंद है। इस तरह के कपड़ों को ट्रेडिशनल टच के साथ पहनना वे जानते हैं। एक समय वो था जब युवराज सिंह का नाम कई बॉलीवुड अभिनेत्रियों के साथ जुड़ा। उन्हीं दिनों से युवराज अपने लुक्स और ड्रेसेस को लेकर सजग रहते हैं। बात चाहे प्रमोशनल इवेंट्स की हो या स्क्रीनिंग की, वे कैजुअल वियर के साथ स्मार्ट दिखने की कला जानते हैं। हॉटेस्ट क्रिकेटर्स के रूप में केविन पीटरसन की शैली सबसे अलग है। युवाओं में उनकी सेक्सी हेयर स्टाइल 'मोहाकÓ छाई रहती है। राहुल द्रविड़ उन खिलाडिय़ों में से एक हैं जिनके वार्डरोब में सोबर कपड़ों की भरमार है। स्टाइल के मामले में राहुल दूसरे खिलाडिय़ों से पीछे ही सही पर वे स्मार्ट ड्रेसिंग और जेंटल लुक की वजह से दर्शकों के चहेते खिलाड़ी बने रहते हैं। फैशनेबल बने रहना सबके लिए आसान नहीं रहता। ये बात अगर इरफान पठान के लिए कही जाए तो गलत नहीं होगा। इरफान फैशन से अलग सुविधायुक्त टी शट्र्स और ट्राउजर्स पहनने को तरजीह देते हैं। ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर  ग्लैन मैक्सवेल  ट्रेंडी लुक को अपने लिए उपयुक्त नहीं मानते।
- ईसा बेल लेटी विराट कोहली की गर्लफ्रेंड हैं। फिलहाल वे मॉडल हैं और जल्दी ही बॉलीवुड फिल्मों में नजर आने की तैयारी कर रही हैं।
 -शिखर धवन की पत्नी आयशा मुखर्जी कुशल बॉक्सर होने के साथ ही दो बेटियों की मां हैं। मां बनने के बाद भी फैशन के प्रति उनकी समझ उनके पहनावे में झलकती है।
 -सांवली सलोनी और खूूबसूरत बालों वाली शेमोन जार्दिम जैक्स केलिस के दिल पर राज करती हैं। शेमोन इस हसीन मॉडल के साथ पिछले पांच सालों से डेटिंग कर रहे हैं।
- ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिशेल जॉनसन की पत्नी जेसिका बेटिच जॉनसन कराटे चैंपियन होने के साथ ही सक्सेसफुल डिजाइनर के तौर पर जानी जाती हैं।
- शेन वॉटसन की प्रेमिका ली फर लॉन्ग को नंबर वन वेग्स के नाम से जाना जाता है। इस मामले में उन्होंने विक्टोरिया बेकहम को भी पीछे छोड़ दिया है।
- जेनी किट्जमेन डेल स्टेन की पत्नी, साउथ अफ्रीका की मॉडल और अभिनेत्री हैं। स्टाइलिश क्रिकेट वेग्स की श्रेणी में जेनी किसी से कम नहीं हैं।
-ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट टीम कप्तान क्लार्क की पत्नी काइली मॉडल और प्रेजेंटर हैं। बहुमुखी प्रतिभा की धनी काइली शियर कवर मेकअप की ब्रांड एंबेसेडर हैं। वे गाउन से लेकर शाट्र्स हर तरह की ड्रेस में अपने स्टाइल को बनाए रखना जानती हैं।

शनिवार, 2 मार्च 2013


हक की बात
हक के साथ



देशभर में महिला अधिकारों की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है। सच्चाई यह भी है कि देश की अधिकांश महिलाओं को सही मायनों में उनके अधिकारों की जानकारी ही नहीं है। एक ओर अगर हम उनकी सुरक्षा को लेकर आज नए अधिकारों की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि जो अधिकार उन्हें प्राप्त हैं, सबसे पहले वे उन अधिकारों के प्रति जागरूक हों....

सामाजिक तौर पर महिलाओं को त्याग, सहनशीलता व शर्मीलेपन का ताज पहनाया
जाता है, जिसके बोझ से दबी महिला कई बार जानकारी होते हुए भी अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाती। बहुत से मामलों में महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उनके साथ हो रही घटनाएं हिंसा हैं और इससे बचाव के लिए कोई कानून भी है। आमतौर पर शारीरिक प्रताडऩा यानी मारपीट, जान से मारना आदि को ही हिंसा माना जाता है और इसके लिए रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाती है।
इसके लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 498 के तहत ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा की गई क्रूरता, जिसके अंतर्गत मारपीट से लेकर कैद में रखना, खाना न देना व दहेज के लिए प्रताडि़त करना आदि आता है, के तहत अपराधियों को 3 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है, पर शारीरिक प्रताडऩा की तुलना में महिलाओं के साथ मानसिक प्रताडऩा के केस ज्यादा होते हैं।
इस तकलीफ को आमतौर पर एक सीमा तक महिलाएं बर्दाश्त करती हैं, क्योंकि परंपरा के नाम पर बचपन से वे यह सहती रहती हैं, लेकिन घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 इन स्थितियों में भी महिला की मदद करता है। इस बारे में अधिवक्ता इंदिरा शुक्ला कहती हैं कि यह धारा महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो उन्हें दुर्गा का रूप प्रदान करती है। खास बात यह है कि घरेलू हिंसा अधिनियम में सभी महिलाओं के अधिकार की रक्षा की संभावना है। इसके तहत विवाहित महिला के साथ-साथ अविवाहित, विधवा, बगैर शादी के साथ रहने वाली महिला, दूसरी पत्नी के तौर पर रहने वाली महिला व 18 वर्ष से कम उम्र के लड़की व लड़का सभी को संरक्षण देने का प्रयास किया गया है। इस कानून में घर में रहने का अधिकार, संरक्षण, बच्चों की कस्टडी व भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार महिलाओं को मिलता है, जो किसी और कानून में संभव नहीं है।
इतनी सुविधाओं के बावजूद अगर कहीं कमी है तो महिलाओं के जागरूक होने में है। इस समय उन्हें उनके हितों का ध्यान रखते हुए जो अधिकार मिले हैं, वो पर्याप्त हैं। इन अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने के लिए वर्कशॉप का आयोजन होना चाहिए। इसका लाभ अधिक से अधिक महिलाओं को मिलेगा। कुछ महिलाएं अगर इन अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहती भी हैं तो कभी भावनात्मक संबंध सामने आ जाते हैं तो कभी समाज में अपमानित होने की वजह से वे आवाज उठाने से डरती हैं। उनके अपने डर की वजह से ही उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। अगर बात आज के परिदृश्य में की जाए तो उन महिलाओं की कमी नहीं जो आसमान छू रही हैं पर यह भी सच है कि महिलाओं व लड़कियों के साथ होने वाली हिंसा भी सीमा से आगे बढ़ रही है। हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ अधिकार लेकर आता है चाहे वह जीने का अधिकार हो या विकास के लिए अवसर प्राप्त करने का, परंतु इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर किए जा रहे भेदभाव की वजह से महिलाएं इन अधिकारों से वंचित रह जाती हैं। इसी विचार के चलते महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु हमारे संविधान में अलग से कानून बनाए गए हैं या समय-समय पर इनमें संशोधन किया गया है। इन अधिकारों की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना भी अब आसान है। इस बारे में अधिवक्ता संतोष मालवीय कहते हैं कि महिला अधिकारों को लेकर प्रशासन ने कुछ किताबें जारी की हैं। इन किताबों में महिलाओं के अधिकार सहित महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग और अदालत संबंधी सारी जानकारी उपलब्ध है। इन किताबों को हर महिला को पढऩा चाहिए। इस बारे में आपस में एक-दूसरे से बातचीत करने पर कानून संबंधी सारी जानकारी मिलना मुश्किल है लेकिन अपने अधिकारों को जानने के लिए ये किताबें हर महिला की मददगार साबित हो सकती हैं।

हिम्मत की कमी है
महिला अधिकारों के बारे में अगर किसी अशिक्षित महिला को जानकारी नहीं है तो बात समझ में आती है लेकिन अगर शिक्षित महिलाएं इस बारे में सजग नहीं हैं तो यह स्थिति दुखद है। मैंने यह भी देखा है कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी तो है लेकिन उनमें हिम्मत की कमी है। कई बार सामाजिक और पारिवारिक मजबूरियों की वजह से वे जुर्म सहती रहती हैं। मैं कहना चाहूंगी कि अब तक आपने बहुत धीरज रखा लेकिन अब वक्त आ गया है जब चुप रहकर नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को पाकर आगे बढ़ें।
उपमा रॉय
अध्यक्ष, राज्य महिला आयोग


समीक्षा भी जरूरी है
एक बार फिर यह खबर है कि इस साल महिला दिवस पर मुख्यमंत्री महिलाओं के लिए नई योजनाओं की घोषणा करेंगे लेकिन पिछले साल जिन योजनाओं की घोषणा की गई थी, उनके परिणामों की जानकारी किसी को नहीं है। अभी जरूरत नई योजनाओं को लागू करने के साथ ही इस बात की भी है कि पिछले साल की योजनाओं की समीक्षा हो। ये सारी बातें सिर्फ कागजों तक ही सीमित क्यों हैं?
रोली शिवहरे
सामाजिक कार्यकर्ता


प्रयास अपने स्तर पर हो
एक महिला को उसके अधिकारों के बारे में जानकारी देने का काम आसपास की महिलाओं को अपने स्तर पर करना चाहिए। अगर हम किसी को परेशानी में देखते भी हैं तो यह उसकी समस्या है, बस इतना सोचकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जब तक ये मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक परेशानी बनी रहेगी।
दीप्ति सिंह
सचिव, म.प्र. कांग्रेस कमेटी, अध्यक्ष, प्रियदर्शनी संस्था


महिलाओं को मिले अधिकार
- घरेलू हिंसा के खिलाफ
- दहेजी विरोधी कानून
- प्लांटेशन लेबर एक्ट
- संपत्ति में बराबर का अधिकार
- वेतन में बराबरी का अधिकार
- मातृत्व लाभ कानून
- स्पेशल मैरिज एक्ट
- सती विरोधी कानून
- गर्भपात कानून

लंबा हुआ इनका इंतजार
- महिला आरक्षण बिल
बिल में महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने की बात है लेकिन इस बिल का शुरू से ही विरोध हो रहा है। राज्यसभा ने इस बिल को 9 मार्च को पारित किया था, परंतु लोकसभा में अब तक इस पर वोटिंग नहीं हुई है। लोकसभा में पेश करने पर सपा इस बिल को फाड़ चुकी है। तब से यह बिल दोबारा लोकसभा में नहीं आया है।
- हिंदू विवाह कानून संशोधन बिल, 2012
इस कानून में तलाक को आसान बनाने के प्रावधान किए गए हैं। इसमें दोनों पक्ष तलाक के लिए राजी होने की स्थिति में महिला के  लिए आसान शर्तें रखी गई हैं लेकिन यह बिल भी संसद में लंबित है।
- कार्यस्थलों पर यौन उत्पीडऩ रोकथाम बिल
यह बिल कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित माहौल मुहैया करवाने के लिए लाया गया था।
- अश्लील चित्रण रोकथाम संशोधन बिल 2012
बिल में टीवी, अखबार और विज्ञापनों में महिलाओं को वस्तु की तरह परोसने की रोकथाम करने से संबंधित है। यह बिल मानसून सत्र 2012 में राज्यसभा में पेश हो चुका है।
- आपराधिक कानून संशोधन बिल 2012
यह बिल भी संसद में लंबित है। इसमें रेप तथा यौन हमलों को रोकने के प्रावधान हैं। इसके अंतर्गत यौन हमलों की शिकायत अब पुरुष भी कर सकते हैं।
- राजीव गांधी नेशनल क्रेच स्कीम फॉर दि चिल्ड्रन ऑफ वर्किंग मदर

दुनिया के मुकाबले कहां हैं भारत की महिलाएं
- शिशु मृत्यु दर (प्रति एक हजार जन्म पर) भारत में 73 प्रतिशत और दुनिया में 60 प्रतिशत
- मातृ मृत्यु दर (प्रति एक लाख जन्म पर) 570 प्रतिशत और दुनिया में 430 प्रतिशत
- महिला साक्षरता 58 प्रतिशत और 77.6 प्रतिशत
- विद्यालयों में बालिकाओं का पंजीकरण भारत में 47 प्रतिशत और दुनिया में 62 प्रतिशत
- महिलाओं की कमाई भारत में 26 प्रतिशत और 58 प्रतिशत
- सामान्य से कम वजन के बच्चे भारत में 53 प्रतिशत और 30 प्रतिशत
 - कुल जन्म दर भारत में 3.2 प्रतिशत और दुनिया में 2.9 प्रतिशत
- जन्म के समय कम वजन वाले बच्चे भारत में 33 प्रतिशत और दुनिया में 17 प्रतिशत

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

स्वस्थ रहें
मस्त रहें
केन सपोर्ट संस्था के द्वारा घोषित आंकड़ों के अनुसार आज भारत में ढाई करोड़ लोग कैंसर के मरीज हैं और लगभग एक लाख कैंसर के मरीज हर साल बढऩे से कैंसर से पीडि़तोंं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी कैंसर को लेकर समाज में कई भ्रांतियां फैली हैं। लोगों में जागरूकता अभी भी कम है जिसकी वजह से कई बार रोगी इस रोग की गंभीरता को समझ ही नहीं पाते। सही समय पर और सही डॉक्टर की देखरेख से कैंसर का इलाज संभव है। इस भयावह बीमारी के बारे में हमने बात की शहर के प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञों से और जाने उनके अनुभव कुछ इस तरह...

इलाज संभव है
डॉ. श्याम अग्रवाल
कैंसर रोग विशेषज्ञ
डायरेक्टर, नवोदय कैंसर हॉस्पिटल
अगर शरीर में असामान्य लक्षण जैसे मुंह कम खुल रहा हो, खांसी में खून, पेशाब या मल-मूत्र में खून हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि ये सारे कैंसर के लक्षण हैं। लोग यह जानते हैं कि ये सारे कैंसर के लक्षण हैं, लेकिन फिर भी शरीर में असामान्य लक्षण दिखने पर लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे रोग बढ़ जाता है। आश्चर्य तो इस बात का है कि सिगरेट और शराब के विज्ञापन से लेकर इन्हें बेचने वाली दुकानों पर वैधानिक चेतावनी भी लिखी होती है। उसके बाद भी लोग नहीं समझते और दूसरों की देखादेखी इस नेश का सेवन करते रहते हैं। स्कूलों के आसपास 100 मीटर तक तंबाकू की दुकान प्रतिबंधित है। यहां तक कि 18 साल से कम उम्र के व्यक्तियों को तंबाकू या गुटखा बेचने पर भी पाबंदी है। इसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने वालों को 200 रुपए जुर्माने का भी प्रावधान है लेकिन ये सारे नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। इन नियमों की अनदेखी करते हुए अधिकांश गुटखे की दुकानें स्कूलों के आसपास बनी हुई है जहां से विद्यार्थी इन्हें खरीदकर कम उम्र में ही इस नशे के आदी हो जाते हैं। इसी तरह हमारे देश में सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने वालों को 200 रुपए जुर्माने की सजा का प्रावधान है लेकिन इन स्थानों पर सिगरेट पीना आम है जिसे कोई रोकने वाला नहीं है। अगर हम विदेशों की बात करें तो वहां सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीने पर 25000 जुर्माना लगता है इसलिए ऐसे स्थानों पर लोग धूम्रपान करने से डरते हैं लेकिन हमारे देश में अगर कहीं कोई व्यक्ति पकड़ा भी जाता है तो उसे ये मालूम है कि वह 200 रुपए देकर छूट जाएगा। कई सेलिब्रिटी कैंसर का इलाज विदेशों में करवा रहे हैं, जिससे आम लोगों को यह लगता है कि यहां कैंसर की सुविधाएं वहां से कम हैं, जबकि ऐसा नहीं है। जो इलाज युवराज सिंह को विदेशों में मिल रहा है वो कई साल पहले क्रिकेटर जे पी यादव को मैंने यहीं रहते हुए दिया था जिसकी वजह से वे आज भी स्वस्थ हैं और अभी तक क्रिकेट खेल रहे हैं। कुछ समय पहले एक युवती मेरे पास आई थी जिसके एक फेफड़े में पानी भर गया था। उसके बचने की उम्मीद कम थी लेकिन लगातार कुछ महीनों तक इलाज के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।

याद रखें
- कैंसर का इलाज संभव है इसलिए इसे लाइलाज बीमारी समझने की भूल न करें।
- इलाज के दौरान अपने दिमाग का इस्तेमाल करने के बजाय डॉक्टर की राय मानें।

जीवन शैली बदलें
डॉ. सुनील कुमार
डी.एम. मेडिकल ओंकोलॉजिस्ट
जवाहर लाल नेहरू, कैंसर हॉस्पिटल

भोपाल में कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज मुंह के कैंसर के हैं। महिलाओं में गर्भाशय और बच्चेदानी का कैंसर सबसे ज्यादा हो रहा है। लोगों की अनियमित दिनचर्या और खान-पान की गलत आदतों का असर जानलेवा बीमारियों जैसे कैंसर के रूप में सामने आ रहा है। देर से शादी होने और डिलीवरी के बाद बच्चों को स्तनपान न करवाने की वजह से स्तन कैंसर का खतरा महिलाओं को ज्यादा रहता है। आजकल महिलाओं में सिगरेट और शराब पीने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है जो कैंसर के फैलने का मुख्य कारण होता है। इस समय सबसे ज्यादा कैंसर 30 से 60 साल के व्यक्तियों को हो रहा है। इसी उम्र के लोगों पर परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ सबसे ज्यादा होता है। ऐसे में अगर लोग अपने सेहत की परवाह न करते हुए इस रोग के प्रति सतर्क नहीं रहते हैं तो पूरा परिवार इस गलती का खामियाजा भुगतता है। बच्चों में लिम्फोमा, ल्यूकेमिया और ब्रेन कैंसर अधिक हो रहा है। इसका मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान बार-बार एक्सरे होना या गलत दवाओं का इस्तेमाल होता है। बच्चे के जन्म के बाद भी अगर उसे बार-बार वायरल इंफेक्शन होता है तो कैंसर होने की संभावना अधिक रहती है।
बरतें सावधानी
- इसका इलाज लंबे समय तक चलता है। इस दौरान मरीजों को धैर्य बनाए रखते हुए सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए।                         
- महिलाओं को गर्भाशय और बच्चेदानी के कैंसर से बचने के लिए पेप्समियर टेस्ट करवाएं।  सरवाइकल कैंसर और हेपेटाइटिस बी से बचने के लिए वैक्सीन बाजार में उपलब्ध है, इन्हें जरूर लगवाएं।

डॉ. प्रशांत कुमार जैन
कैंसर सर्जन
चिरायु हॉस्पिटल
रोबोट पद्धति वरदान है
कैंसर के लिए बनाई गई आधुनिक टारगेटेड थेरेपी के द्वारा बिना किसी साइड इफेक्ट के इलाज संभव है। इसके अलावा कीमोथेरेपी, रेडिएशन, आईएमआरटी और इम्युनोथेरेपी के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है। कैंसर के रोगियों के लिए रोबोट पद्धति वरदान साबित हो रही है। इस रोग से बचने के लिए सबसे पहले समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना होगा। मेरे पास जो मरीज आते हैं, उनमें से कुछ का यह कहना है कि भोपाल के पानी में कैल्शियम की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए वे तंबाकू के साथ चूना खाते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। हमारे देश में लोगों का किसी भी बीमारी को ठीक करने के लिए देसी दवाएं लेने पर अटूट विश्वास है जिसकी वजह से बीमारी बढऩे का खतरा बना रहता है। मैंने अपनी टीम के साथ 6 महीने से लेकर 86 साल तक के मरीजों के कैंसर को ठीक किया है। एक महिला के मुंह से 13 किलो का ट्यूमर निकाला और उसका सफल इलाज भी किया। इसी तरह एक दूसरे केस में किडनी के ट्यूमर को ठीक किया।

मेरी सलाह है
- इस रोग से बचने के लिए प्रशासन कई सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। कई अस्पतालों में मुफ्त इलाज उपलब्ध है। इन सुविधाओं का फायदा अवश्य उठाएं।
- कैंसर का इलाज किसी कैंसर विशेषज्ञ की देखरेख में ही करवाएं। हमारे देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो कैंसर जैसी भयावह बीमारी का इलाज भी विशेषज्ञों की राय के बिना करवाते रहते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि तमाम कोशिशों के बाद भी कैंसर के बारे में जागरूकता की कमी है।

मृत्युदर में कमी आई है
डॉ. टी पी साहू
कैंसर रोग विशेषज्ञ
विभागाध्यक्ष, चिरायु मेडिकल कॉलेज
पहले कैंसर होने पर जिस अंग में कैंसर है उसे शरीर से अलग कर दिया जाता था लेकिन अब आधुनिक तकनीकी की वजह से क्षतिग्रस्त अंग को बचाने पर जोर दिया जाता है। इस तकनीकी की वजह से कैंसर के मरीजों की मृत्युदर में कमी आई है। मेरे पास आष्टा से एक मरीज आया था जिसे फेफड़ों का कैंसर और टीबी दोनों थे। वो वेंटिलेटर पर था। चार महीने तक उसका इलाज जारी रहा। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है। इस बीमारी से बचने के लिए सिर्फ कैंसर विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि कैंसर के रोगी के लिए मनोवैज्ञानिक, आहार विशेषज्ञ, सलाहकार और फिजियोथेरेपिस्ट सभी को काम करना होगा।
एहतियात बरतें जैसे-
- कैंसर पूरी तरह से ठीक होने के बाद भी मरीज को इस डिप्रेशन से बाहर आने के लिए मनोवैज्ञानिक से राय लेना चाहिए।
- साइबरनाइस और रेडियो थेरेपी के माध्यम से कैंसर को जड़ से खत्म किया जा सकता है इसलिए इस बीमारी का पता चलने पर हिम्मत न हारें, बल्कि हिम्मत के साथ इलाज करवाने पर ध्यान दें।
भ्रांतियों को मिटाएं
डॉ. रवि गुप्ता
कैंसर सर्जन
डायरेक्टर, लेक सिटी हॉस्पिटल
अगर मुंह में छाले हों, लंबे समय तक खांसी या बुखार आए और शरीर के किसी भी अंग से असामान्य रक्तस्राव हो तो इन्हें कैंसर के लक्षण समझते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कई लोग यह मानते हैं कि कैंसर का इलाज बहुत महंगा है, जबकि ऐसा नहीं है। कुछ लोगों को लगता है कि बायोप्सी होने से कैंसर सारे शरीर में फैल जाता है और इसलिए वे बायोप्सी करवाना नहीं चाहते, जबकि बायोप्सी इसलिए की जाती है ताकि क्षतिग्रस्त ऊतकों को फैलने से रोका जा सके।

याद रखें
- कैंसर के मरीज के साथ रहने से अन्य व्यक्ति को भी कैंसर हो जाता है, जैसी भ्रांतियां दिमाग से निकाल दें।
- लोगों की कही बात पर विश्वास करने के बजाय कैंसर रोग विशेषज्ञ पर विश्वास करें और उसी के अनुसार उचित इलाज करवाएं।

सोमवार, 14 जनवरी 2013


मु_ी में है तकदीर हमारी
दामिनी के इस दुनिया से चले जाने के बाद जो आंधी आई है, उसने देश की हर लड़की को प्रभावित किया है। इसके चलते कहीं उन्हें घर से निकलते समय बैग में मिर्ची पाउडर रखने की सलाह दी जा रही है तो कहीं मार्शल आर्ट सीखकर आत्मरक्षा की बात पर बल दिया जा रहा है। वक्त चाहे करवट जैसे भी ले लेकिन फिर भी इन लड़कियों ने खुद को साबित करने की कसौटी पर खरा उतरने की चाहत हर हाल में पूरी करने की कसम खाई है। 12 जनवरी युवा दिवस पर वे खुद को किसी बंधन में बंधकर नहीं, बल्कि उन्मुक्त रूप से जो है उसी रूप में स्वीकार करते हुए आगे बढऩे की ख्वाहिश जाहिर करती हैं...

कड़ी सजा मिले
दिव्यंका त्रिपाठी, अभिनेत्री, मॉडल
लड़कियों के साथ बढ़ती आपराधिक घटनाओं को रोकने की पहल उन अपराधियों को कड़ी सजा देकर करना चाहिए जिनके गुनाह की सजा मासूम लड़कियां सारी उम्र झेलती हैं। अरब देशों में अगर कोई छेडख़ानी करता है तो उस पर तुरंत कार्रवाई होती है लेकिन हमारे देश की विडंबना यही है कि सख्त कानून न होने के चलते अपराधी खुलेआम घूमते हैं या पकड़े जाने पर भी सजा होने में कई साल लग जाते हैं। पूरे देश में लड़कियों के साथ होने वाले अपराधों को देखते हुए बस यही कहंूगी कि सबकी इज्जत करें लेकिन विश्वास किसी पर न करें। कई बार आपके रिश्तेदार, पड़ोसी या मदद करने वाले लोग ही आपकी मासूमियत का फायदा उठाते हैं इसलिए सतर्क रहना सीखें।

संकल्प लें
- अगर आप शहर से बाहर रहती हों तो विशेष तौर से अपने घर के लोगों से प्रतिदिन संपर्क बनाए रखें। इसका फायदा उस समय भी मिलता है जब आप किसी मुसीबत में हों और उनसे बात न कर पाएं तो उन्हें इसी बात से शक हो जाएगा कि आज आपका फोन नहीं आया है। इसका मतलब यह है कि आप मुश्किल में हैं।
- अगर कहीं बाहर जा रहे हैं तो इस बात की जानकारी अपने करीबी दोस्तों और अभिभावकों को जरूर दें।
आवाज उठाना सीखें
अंशुल के सोनी
डायरेक्टर, एजी8 गु्रप

अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सीखें। हक की बात करें और अपना हक लेकर रहें। लड़कियों के साथ हो रहे अपराधों को रोकने की पहल सबसे पहले लड़कियों को ही करनी होगी। अगर सेना और पुलिस प्रशासन में लड़कियां अपने साहस का परिचय दे सकती हैं तो हम भी उन्हीं में से एक हैं जिन्हें पूरे आत्मविश्वास के साथ विषम परिस्थितियों में साहस बनाए रखना चाहिए।
संकल्प लें
- अपनी मर्जी से हर काम करने के बजाय घर वालों की सलाह जरूर लें।
-अपनी जिम्मेदारी हर व्यक्ति समझे और उसे अपने स्तर पर निभाने की कोशिश भी करे। हम दूसरों के मामले में क्यों पड़ें या दूसरों की परेशानी से हमें क्या मतलब जैसे विचारों को त्यागकर ये सोचें कि जो किसी दूसरे के साथ हुआ है, वो कभी आपके साथ भी हो सकता है।
हमें भी हक है
सुरभि होम्बल
नृत्यांगना
देश के विकास में जितना योगदान लड़कों ने दिया है, उतना ही लड़कियों का भी है। अगर विकास में भागीदारी दोनों की बराबर है तो फिर परिवार से लेकर समाज और विभिन्न मुद्दों पर लड़कों के पक्ष में बात क्यों की जाती है? अगर लड़कों को आगे बढऩे का हक है तो लड़कियां पीछे क्यों रहें? हां यह भी सच है कि लड़कियां कभी-कभी अपनी सीमा से बाहर हो जाती हैं या पहनावे पर ध्यान नहीं देती। इसके अलावा नशे की लत लड़कियों में जिस तेजी से बढ़ती जा रही है, उसके सेवन से बचें। साथ ही तमाम बंदिशों में खुद को कैद करने के बजाय अपनी सुरक्षा के बारे में खुद सोचें।
संक ल्प लें
- जब बस में कम लोग हों तो न बैठेें।
- ऑटों में भी अकेले बैठने से बचें।
- अगर आपके साथ कोई छेड़छाड़ करे तो जोर से चिल्लाएं ताकि आसपास खड़े लोगों का ध्यान उस ओर आकर्षित हो।   
सोच में बदलाव जरूरी है   
कीर्ति श्रीवास्तव
इंटीरियर डिजाइनर
लड़कियों की सुरक्षा के चाहे जितने उपाय अपना लिए जाएं लेकिन उन सबसे जरूरी है, लड़कों की सोच में बदलाव लाना। लड़कियों को अपने घर में ही सबसे पहले यह समझाया जाता है कि वह कमजोर है और उसका भाई ज्यादा शक्तिशाली। वे खुद को कमजोर समझते हुए ही बड़ी होती हैं और उनकी यही सोच उस वक्त भी बनी रहती है, जब उन पर किसी तरह का अत्याचार होता है। जब ईश्वर ने उनकी क्षमताओं को किसी तरह से कम नहीं आंका है तो लोग क्यों उन्हें अबला समझने की गलती करते हैं। हम जो हैं सो हैं और सबसे बेहतर है, इसी सोच को हर लड़की को अपनाने की जरूरत है।
संकल्प लें
 - आपके साथ हो रही किसी भी तरह की छेडख़ानी को चुप रहकर न सहें।
- ये याद रखें कि हर जगह पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए नहीं पहुंच सकती इसलिए दूसरों के भरोसे रहने के बजाय अपनी रक्षा खुद करना सीखें।
संध्या चंद्राकर
कराटे खिलाड़ी
विक्रम अवार्डी
हमें अपनी बेहतरी के लिए सबसे पहले खुद पर विश्वास रखना होगा। मुश्किल हालातों में परेशानी उस वक्त बढ़ जाती है जब हम घबरा जाते हैं। मैं 19 साल से कराटे सीख रही हूं। कराटे सीखकर हम न सिर्फ खुद की, बल्कि परिवार या अपने आसपास दूसरों की रक्षा भी कर सकते हैं।
संकल्प लें
- हालात चाहे जो भी हों अपना विश्वास डगमगाने न दें।
- हर काम को करने की ताकत आप में है। इसे अपनी सफलता का मूल मंत्र मानकर चलें।

मानसिकता बदलें
बी के संधु
उपनिरीक्षक, थाना हबीबगंज
इंचार्ज, महिला हेल्प लाइन
बलात्कार जैसे अपराधों को रोकने के लिए लोग लड़कि यों के पहनावे पर पाबंदी लगाने की बात करते हैं लेकिन ये क्यों भूल जाते हैं कि जो लड़कियां सलवार कमीज पहन रही हैं उनके साथ भी बलात्कार हो रहा है या 3-4 साल की लड़कियां भी रैप की शिकार हो रही हैं तो फिर बात पहनावे की कहां है। यहां बात पुरुषों की मानसिकता में बदलाव लाने की होना चाहिए। इसके अलावा आम लोगों का संवेदनशील होना जरूरी है। अगर अपराध करना पाप है तो उसे होते देखकर चुप रहना भी पाप ही है।
विश्वास बनाए रखें
कुमुद सिंह
सचिव, सरोकार
दिल्ली में हुए गैंगरेप के बाद कई बच्चियों के माता-पिता मुझसे कहते हैं कि आप ही बताएं हम बेटियों को पैदा क्यों करें। तो मैं उनसे कहती हूं कि इस डर को निकालकर उन्हें अपनी रक्षा के लिए किस तरह शिक्षित किया जाए, इस बारे में विचार करना चाहिए। अपनी बेटियों को नजरें चुराकर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ नजरें ऊंची करके चलना सिखाएं। कोई भी परेशानी आने पर बिना घबराए उसका सामना करना सिखाएं और उसका संबल बनाए रखने में मदद करें।
कॉफी कल्चर


कॉफी हाउस में कॉफी की महक, वेटर का वो सादा लिबास, सिर पर ताज की तरह सजती नेहरू टोपी और सबसे अहम विचारधाराओं के संगम की अवधारणा को लिए तरह-तरह के लोगों के मिलने की लोकतांत्रित जगह कॉफी हाउस ही है। ठंड के मौसम में गर्म-गर्म कॉफी और गपशप के बीच कॉफी हाउस में युवाओं के बीच चलती बातचीत का दौर या साहित्यकारों की गोष्ठियों का माहौल देखते ही बनता है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कॉफी हाउस की तरह विदेशी ब्रांड के कॉफी शॉप छोटे शहरों में अपना रंग जमा रहे हैं। युवाओं और विद्वानों ने मिलकर कॉफी कल्चर को बनाए रखने में खासा योगदान दिया है...

कॉफी की लोकप्रियता हमेशा से ही गपशप और सृजनात्मक गतिविधियों से जुड़ी देखने को मिली है। गौरतलब है कि भारत के ख्यात लेखन, रंगमंच और अध्ययन-अध्यापन से जुड़े व्यक्तियों ने कॉफी हाउस में बैठ कॉफी के प्याले के साथ ही रचनात्मक कार्य किए हैं। ब्रितानी लेखिका जेके रॉलिंग्स ने स्थानीय कॉफी शॉप में हैरी पॉटर सीरीज की अधिकतर किताबों का लेखन किया था। यहां तक कि बड़ी क्रांतियों या आंदोलन के सूत्रपात्र में भी कॉफी आउटलेट ने मुख्य भूमिका निभाई। 60 के दशक के मध्य से फैला बंगाल का नक्सलवादी आंदोलन कॉफी हाउस में ही विस्तृत हुआ था। साथ ही 1695 में फ्रांस की राज्य क्रांति की जड़ें पर्शियन कैफे से जुड़ी थीं। चाहे जो कहिए, लोकप्रियता ने लीक से हटकर रंग लेना भी शुरू किया और कॉफी हाउस की तरह विदेशी ब्रांड के कॉफी शॉप मेट्रो सिटीज में खुलने लगे। वर्तमान युवा पीढ़ी ने इन्हीं कॉफी हाउस को गपशप का केंद्र बनाया। कॉफी शॉप अपनी अत्याधुनिक आंतरिक सज्जा और जंक फूड्स व कॉफी की कई वैराइटीज की वजह से युवाओं में पैठ बनाने में सफल रही हैं। 1990 के दशक में इंटरनेट एक्सेस करने और कॉफी का लुत्फ उठाने के बहाने कॉफी शॉप्स ने नया रूप साइबर कैफे का ले लिया। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इन्हीं स्थानों पर कई बड़े साइबर अपराध कॉफी के घंूट के साथ अंजाम दिए जाते हैं।

बॉक्स में
हर उम्र के लोग कॉफी हाउस में आते हैं। फिल्टर कॉफी पीने के अलावा यहां आने वालों को मसाला डोसा और सांभर वड़े का स्वाद पसंद आता है। शहर में चाहे कितने ही नए रेस्टोरेंट खुल जाएं लेकिन इंडियन कॉफी हाउस में आने वाले लोगों की संख्या में कभी कमी नहीं होती। इसकी वजह खाने की अच्छी गुणवत्ता और यहां का माहौल है।
एम बी हरिदास
एडीशनल जनरल मैनेजर
इंडियन कॉफी हाउस, बोर्ड हाउस चौराहा

इंडियन कॉफी हाउस में जाने के ऐसे कई शौकीन लोग शहर में मौजूद हैं जिनका दिन कॉफी हाउस में जाए बिना पूरा नहीं होता। ऐसे ही लोगों में शामिल हैं प्रसिद्ध साहित्यकार उद्यन वाजपेयी। उद्यन कॉफी हाउस के महत्व को अपने शब्दों में कुछ इस तरह बयां करते हैं। कॉफी हाउस ऐसी लोकतांत्रिक जगह है जहां सबके साथ समान व्यवहार होता है। रेस्टोरेंंट के माहौल से कॉफी हाउस का माहौल बिल्कुल अलग होता है। मैं पिछले तीन साल से लगभग रोज ही कॉफी हाउस में जाता हूं। वहां कभी दोस्तों के साथ बातचीत तो कभी किताब लिखने या अन्य लेखकों की किताब पढऩे में समय बीतता है। अगर किसी से मिलना हो तो इससे अच्छी जगह कोई और नहीं होती। वैसे तो कॉफी हाउस की संस्कृति बहुत पुरानी है। इंग्लैंड और फ्रांस में बड़ी बहसें कॉफी हाउस में ही हुआ करती थीं। हमारे देश में जब यह संस्कृति पनपी तो राम मनोहर लोहिया जैसे महान राजनीतिज्ञ कॉफी हाउस में ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करने के लिए लोगों को बुलाते थे। उसके बाद कॉफी हाउस में लेखक, पत्रकार और चित्रकारों ने अपना समय बिताना शुरू किया। उद्यन वाजपेयी ने जाने-माने फिल्मकार मनीकौल के साथ एक फिल्म की पटकथा न्यू मार्केट स्थित कॉफी हाउस में बैठकर ही लिखी थी। कॉफी हाउस का मतलब अगर साहित्यकारों के लिए चिंतन-मनन का अच्छा केंद्र है तो युवाओं के लिए कम पैसों में फुल इंटरटेनमेंट की यह सस्ती और सुलभ जगह है। एक्सीलेंस कॉलेज के बीकॉम सेकंड ईयर के विद्यार्थी पलाश जैन कहते हैं कि अपने दोस्तों के साथ अगर मस्ती करने का मूड हो तो कॉफी हाउस की कोने वाली सीट सबसे अच्छी जगह होती है। वहां आपको परेशान करने वाला कोई नहीं होता। इसी तरह गर्लफ्रेंड को मनाने या वेलेंटाइन डे से लेकर फ्रेंडशिप डे पर हमारा वक्त इन्हीं कॉफी हाउस में फिल्टर कॉफी और कटलेट का आनंद लेते हुए बीतता है। इस सदी की महान लेखिका जे के रोलिंग को कॉफी हाउस के माहौल ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी किताबों का अधिकांश भाग वहीं बैठ कर पूरा किया। प्रसिद्ध चित्रकार अखिलेश की कॉफी हाउस से कॉलेज के दिनों की यादें जुड़ी हुई हैं। उन दिनों वे इंदौर में कॉलेज के पास स्थित कॉफी हाउस में वक्त बिताते थे। वे कहते हैं कि कॉफी हाउस में धड़कता हुआ जीवन दिखाई देता है। अगर किसी विषय पर दोस्तों की सलाह चाहिए तो उनके साथ कॉफी की चुस्कियों के बीच बैठकर देर तक बातचीत का दौर चलता रहता है। इस सार्वजनिक जगह पर भी एक तरफ बैठकर एकांत का अहसास होता है। बिजनेस वूमेन मानसी के लिए कॉफी हाउस अगर अपने कलीग के साथ डीलिंग करने की अच्छी जगह है तो शहर में मौजूद किटी पार्टियों की शौकीन महिलाएं यहां बैठकर इन पार्टियों को अंजाम देना पसंद करती हैं। कभी ताश के पत्तों के बीच समय बिताने या कभी सहेलियों की गॉसिप के लिए कॉफी हाउस को मुफीद जगह माना गया है। प्रसिद्ध कवि कुमार अंबुज कॉफी हाउस के कम होते महत्व के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि कॉफी हाउस की संस्कृति अब शहर में नहीं रही है। इसका सबसे बड़ा कारण बढ़ती हुई व्यवसायिकता है। वे कहते हैं कि पहले मैं गुना में रहता था। काम के सिलसिले में भोपाल अक्सर आता था तो इंडियन कॉफी हाउस जरूर जाता था। उस वक्त जो लोग कॉफी हाउस में मिलते थे, उन्होंने अब जाना बंद कर दिया। लोगों का दृष्टिकोण बदला है। यहां ऐसे लोगों की अधिकता है जो अपना स्वार्थ सिद्ध होने के उद्देश्य से कॉफी हाउस में मिलने लगे हैं। इस दौरान अगर उन दो लोगों की बातचीत चलती रहे और कोई तीसरा पहुंच जाए तो उन्हें अच्छा नहीं लगता। बदलते दौर में इंडियन कॉफी हाउस का माहौल जरूर बदला है लेकिन दूसरी टेबिल पर हो रही बातचीत से दूर अपनी टेबिल पर विचारों में मग्न हो जाना कुमार अंबुज को प्रभावित किए बिना नहीं रहता।

कमाल की है कॉफी
- 1822 में सबसे पहले फ्रेंचवासियों ने एस्प्रेसो मशीन का आविष्कार किया।
- कॉफी को यूरोप में अरेबियन वाइन के नाम से जाना जाता था।
- कॉफी की 50 से अधिक प्रजातियां दुनियाभर में मौजदू हैं।
- हर साल 50 बिलियन कप कॉफी पी जाती है जिसमें से 25 बिलियन कप कॉफी सिर्फ नाश्ते के दौरान ही खत्म हो जाती है।
- एस्प्रेसो कॉफी में 2.5 प्रतिशत वसा होती है, जबकि फिल्टर कॉफी में 0.6 प्रतिशत
वसा होती है।
- जापान में कॉफी स्पा है जहां लोग कॉफी के टब में बैठकर नहाने का मजा लेते हैं।
- इटली में इस वक्त 200,000 कॉफी शॉप्स हैं और अन्य स्थापित हो रहे हैं।
- पिछले तीन दशकों में पश्चिमी देशों के 90 प्रतिशत लोगों ने चाय छोड़कर कॉफी पीना शुरू किया है।
दर्द पर पलती मुस्कुराहटें

फिल्मी पर्दे की रौनक और चमक-दमक के बीच सिने तारिकाओं की जिंदगी झूलती रहती है। अनेक विवादों से घिरी जिंदगी केबीच भी वे कई कल्याणकारी कार्यों में लगी रहती हैं। दूसरों का जीवन चाहे उनकी वजह से रोशन हो लेकिन उनके अपने जीवन में कभी घर में मिली प्रताडऩा तो कभी बेवफाई की वजह से अंधेरा छाया रहता है। ऐसी कई सिने तारिकाएं हमारे दिलों पर छाई हुई हैं जो न सिर्फ घरेलू हिंसा की शिकार हुईं, बल्कि इसका विरोध करने पर उन्हें घर में जुल्मों सितम भी सहना पड़ा....

ग्लैमर जगत की वे सिने तारिकाएं जिनके कदम रखते ही चारों ओर से उन्हें अपने फैन्स की आवाज सुनाई देने लगती है। उनकी एक झलक पाने के लिए लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। सारी दुनिया में धूम मचाने वाली ये हसीनाएं जब अपने ही घर में प्रताडि़त की जाती हैं तो ये बात न सिर्फ उनके खुद के लिए, बल्कि उनके फैंस के लिए भी दुखदायी होती है। २010 में कोलकाता की मॉडल डिंपी गांगुली ने राहुल महाजन से शादी की थी। शादी के कुछ महीनों बाद ही राहुल द्वारा डिंपी को मारने की शिकायत आई थी। राहुल का अपनी पत्नी के साथ ये दुव्र्यवहार पहली बार नहीं है, बल्कि राहुल की पहली पत्नी श्वेता सिंह भी अपने पति के  खिलाफ शारीरिक शोषण का केस दर्ज करवा चुकी हैं। 70 के दशक में अपनी अदाओं के जलवे बिखेरने वाली दिलकश अदाकारा जीनत अमान का निजी जीवन परेशानियों से भरा रहा। अभिनेता संजय खान के साथ उनके संबंध लंबे समय तक चर्चा में रहे। इसी बीच ये बात भी लोगों की जुबान पर रही कि संजय ने जीनत अमान को कई बार मारा जिसकी वजह से उनकी आंख में चोट लगी। मोस्ट स्टाइलिश सिने तारिका के रूप में जिस अभिनेत्री के चाहने वाले न सिर्फ हिंदुस्तान में, बल्कि सारी दुनिया में रहे, उसकी दुर्दशा यह रही कि उनके दूसरे पति मजहर खान भी शादी के बाद उन्हें शारीरिक यातना देते रहे। मजहर के साथ जीनत के संबंध उनकी कैंसर से मृत्यु हो जाने के पहले तक कभी मधुर नहीं रहे। युक्तामुखी ने पिछले साल उनके पति पिं्रस तुली के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। पूर्व मिस यूनिवर्स का खिताब जीत चुकी युक्ता के अनुसार अपने पति द्वारा वे कई बार घरेलू हिंसा की शिकार हुई हैं। एक समय वो था जब 1990 में सलमान खान की एक्स गर्लफ्रेंड सोमी अली खान के साथ उनके अफेयर के चर्चे जोरों पर थे। उनके इश्क की दास्तान सलमान के दुव्र्यवहार की वजह से खत्म हुई। उसके बाद सोमी अली अमेरिका चली गईं और एक ऐसी संस्था के लिए कार्य कर रही हैं जो महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों और शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करती है। सोमी के बाद ऐश्वर्या रॉय ने सलमान के खिलाफ मारपीट की बात उन दिनों स्वीकार की थी, जब दोनों के बीच इश्क परवान पर था।  अदनान सामी की पहली पत्नी सबाह गलदारी ने 2009 में अपने पति के विरुद्ध मुंबई में शारीरिक शोषण की शिकायत दर्ज करवाई। सबाह का कहना था कि अदनान उसे जलती हुई सिगरेट से जलाता था। तीन साल तक पति के अत्याचार सहने के बाद सबाह ने अदनान से तलाक ले लिया। हॉलीवुड की मारिया केरी एक गायिका और अभिनेत्री के रूप में मशहूर हैं। मारिया का दावा था कि उनके पहले पति टॉमी मटोला उन्हें मानसिक रूप से प्रताडि़त करते हैं। इसका नकारात्मक प्रभाव न सिर्फ मारिया के निजी जीवन पर, बल्कि उनके कैरियर पर भी पड़ा। बाद में उन्होंने लेरी किंग से दूसरी शादी कर ली। व्हीटनी  ह्यूस्टन के साथ उनके पति बॉबी ब्राउन ने कई साल तक अत्याचार किया। अंत में तंग आकर ह्यूस्टन ने अपने पति के खिलाफ अदालत में कार्रवाई की। 2003 में घरेलू हिंसा के मामले में ब्राउन को जेल हुई। 2009 में प्री ग्रेमी पार्टी के दौरान रिहाना और क्रिस ब्राउन के बीच भारी भीड़ के सामने जो झगड़ा बढ़ा वो इस हद तक बढ़ा जिसकी वजह से क्रिस ने रिहाना को इतना मारा कि उनके शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान दिखाई देने लगे। इस घटना का मुख्य कारण यह था कि रिहाना ने क्रिस की गर्लफ्रेंड का मैसेज उसके सेल फोन पर पढ़ लिया था। अभिनेत्री और गायिका मेडोना को 1988 में घरेलू हिंसा का सामना उस वक्त करना पड़ा, जब वे अपने पहले पति सियेन पेन के साथ रहती थीं। उसके बाद दोनों ने तलाक ले लिया।
मेडोना की यह शिकायत थी कि उनके पति ने कभी उनसे अच्छा व्यवहार नहीं किया।
टीना टर्नर एक गायिका के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। टीना के अनुसार उनके पति इक टर्नर ने उनके साथ कई बार बलात्कार किया और वे उन्हें सिगरेट से जलाते भी थे। उनके साथ होने वाली हिंसा की घटनाओं का जिक्र टीना ने अपनी आत्मकथा में भी किया है। गवाहों के बयान के आधार पर टीना द्वारा इक पर लगाए गए सारे आरोप सही साबित हुए। जब कंगना रानाउत ने मुंबई आकर अपने कैरियर की शुरुआत की थी तो उनके इश्क की चर्चा पहले से शादीशुदा आदित्य पंचोली के साथ थी। कंगना का कहना है कि उन दिनों आदित्य ने उनके साथ मारपीट भी की थी। हॉलीवुड अभिनेत्री हेले बेरी को 2004 में उनके प्रेमी ने इतना मारा था कि जिसकी वजह से उनके कान में गहरी चोट आई थी। हालांकि हेले ने अपने प्रेमी का नाम कभी नहीं बताया। पामेला एंडरसन के साथ ली जोंस की शादीशुदा जिंदगी चार साल तक रही। इस दौरान भी पामेला को उसके पति ने गर्भावस्था में भी कई बार शारीरिक यातनाएं दीं। पामेला की शिकायत पर जॉन को जेल की हवा खानी पड़ी। टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी के उनके पति राजा चौधरी के साथ वैवाहिक संबंध हमेशा खराब ही रहे। श्वेता का कहना है कि राजा ने न सिर्फ उसे, बल्कि उसकी बेटी पलक को भी जान से मारने की कोशिश की।