सोमवार, 14 जनवरी 2013

कॉफी कल्चर


कॉफी हाउस में कॉफी की महक, वेटर का वो सादा लिबास, सिर पर ताज की तरह सजती नेहरू टोपी और सबसे अहम विचारधाराओं के संगम की अवधारणा को लिए तरह-तरह के लोगों के मिलने की लोकतांत्रित जगह कॉफी हाउस ही है। ठंड के मौसम में गर्म-गर्म कॉफी और गपशप के बीच कॉफी हाउस में युवाओं के बीच चलती बातचीत का दौर या साहित्यकारों की गोष्ठियों का माहौल देखते ही बनता है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कॉफी हाउस की तरह विदेशी ब्रांड के कॉफी शॉप छोटे शहरों में अपना रंग जमा रहे हैं। युवाओं और विद्वानों ने मिलकर कॉफी कल्चर को बनाए रखने में खासा योगदान दिया है...

कॉफी की लोकप्रियता हमेशा से ही गपशप और सृजनात्मक गतिविधियों से जुड़ी देखने को मिली है। गौरतलब है कि भारत के ख्यात लेखन, रंगमंच और अध्ययन-अध्यापन से जुड़े व्यक्तियों ने कॉफी हाउस में बैठ कॉफी के प्याले के साथ ही रचनात्मक कार्य किए हैं। ब्रितानी लेखिका जेके रॉलिंग्स ने स्थानीय कॉफी शॉप में हैरी पॉटर सीरीज की अधिकतर किताबों का लेखन किया था। यहां तक कि बड़ी क्रांतियों या आंदोलन के सूत्रपात्र में भी कॉफी आउटलेट ने मुख्य भूमिका निभाई। 60 के दशक के मध्य से फैला बंगाल का नक्सलवादी आंदोलन कॉफी हाउस में ही विस्तृत हुआ था। साथ ही 1695 में फ्रांस की राज्य क्रांति की जड़ें पर्शियन कैफे से जुड़ी थीं। चाहे जो कहिए, लोकप्रियता ने लीक से हटकर रंग लेना भी शुरू किया और कॉफी हाउस की तरह विदेशी ब्रांड के कॉफी शॉप मेट्रो सिटीज में खुलने लगे। वर्तमान युवा पीढ़ी ने इन्हीं कॉफी हाउस को गपशप का केंद्र बनाया। कॉफी शॉप अपनी अत्याधुनिक आंतरिक सज्जा और जंक फूड्स व कॉफी की कई वैराइटीज की वजह से युवाओं में पैठ बनाने में सफल रही हैं। 1990 के दशक में इंटरनेट एक्सेस करने और कॉफी का लुत्फ उठाने के बहाने कॉफी शॉप्स ने नया रूप साइबर कैफे का ले लिया। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इन्हीं स्थानों पर कई बड़े साइबर अपराध कॉफी के घंूट के साथ अंजाम दिए जाते हैं।

बॉक्स में
हर उम्र के लोग कॉफी हाउस में आते हैं। फिल्टर कॉफी पीने के अलावा यहां आने वालों को मसाला डोसा और सांभर वड़े का स्वाद पसंद आता है। शहर में चाहे कितने ही नए रेस्टोरेंट खुल जाएं लेकिन इंडियन कॉफी हाउस में आने वाले लोगों की संख्या में कभी कमी नहीं होती। इसकी वजह खाने की अच्छी गुणवत्ता और यहां का माहौल है।
एम बी हरिदास
एडीशनल जनरल मैनेजर
इंडियन कॉफी हाउस, बोर्ड हाउस चौराहा

इंडियन कॉफी हाउस में जाने के ऐसे कई शौकीन लोग शहर में मौजूद हैं जिनका दिन कॉफी हाउस में जाए बिना पूरा नहीं होता। ऐसे ही लोगों में शामिल हैं प्रसिद्ध साहित्यकार उद्यन वाजपेयी। उद्यन कॉफी हाउस के महत्व को अपने शब्दों में कुछ इस तरह बयां करते हैं। कॉफी हाउस ऐसी लोकतांत्रिक जगह है जहां सबके साथ समान व्यवहार होता है। रेस्टोरेंंट के माहौल से कॉफी हाउस का माहौल बिल्कुल अलग होता है। मैं पिछले तीन साल से लगभग रोज ही कॉफी हाउस में जाता हूं। वहां कभी दोस्तों के साथ बातचीत तो कभी किताब लिखने या अन्य लेखकों की किताब पढऩे में समय बीतता है। अगर किसी से मिलना हो तो इससे अच्छी जगह कोई और नहीं होती। वैसे तो कॉफी हाउस की संस्कृति बहुत पुरानी है। इंग्लैंड और फ्रांस में बड़ी बहसें कॉफी हाउस में ही हुआ करती थीं। हमारे देश में जब यह संस्कृति पनपी तो राम मनोहर लोहिया जैसे महान राजनीतिज्ञ कॉफी हाउस में ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करने के लिए लोगों को बुलाते थे। उसके बाद कॉफी हाउस में लेखक, पत्रकार और चित्रकारों ने अपना समय बिताना शुरू किया। उद्यन वाजपेयी ने जाने-माने फिल्मकार मनीकौल के साथ एक फिल्म की पटकथा न्यू मार्केट स्थित कॉफी हाउस में बैठकर ही लिखी थी। कॉफी हाउस का मतलब अगर साहित्यकारों के लिए चिंतन-मनन का अच्छा केंद्र है तो युवाओं के लिए कम पैसों में फुल इंटरटेनमेंट की यह सस्ती और सुलभ जगह है। एक्सीलेंस कॉलेज के बीकॉम सेकंड ईयर के विद्यार्थी पलाश जैन कहते हैं कि अपने दोस्तों के साथ अगर मस्ती करने का मूड हो तो कॉफी हाउस की कोने वाली सीट सबसे अच्छी जगह होती है। वहां आपको परेशान करने वाला कोई नहीं होता। इसी तरह गर्लफ्रेंड को मनाने या वेलेंटाइन डे से लेकर फ्रेंडशिप डे पर हमारा वक्त इन्हीं कॉफी हाउस में फिल्टर कॉफी और कटलेट का आनंद लेते हुए बीतता है। इस सदी की महान लेखिका जे के रोलिंग को कॉफी हाउस के माहौल ने इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी किताबों का अधिकांश भाग वहीं बैठ कर पूरा किया। प्रसिद्ध चित्रकार अखिलेश की कॉफी हाउस से कॉलेज के दिनों की यादें जुड़ी हुई हैं। उन दिनों वे इंदौर में कॉलेज के पास स्थित कॉफी हाउस में वक्त बिताते थे। वे कहते हैं कि कॉफी हाउस में धड़कता हुआ जीवन दिखाई देता है। अगर किसी विषय पर दोस्तों की सलाह चाहिए तो उनके साथ कॉफी की चुस्कियों के बीच बैठकर देर तक बातचीत का दौर चलता रहता है। इस सार्वजनिक जगह पर भी एक तरफ बैठकर एकांत का अहसास होता है। बिजनेस वूमेन मानसी के लिए कॉफी हाउस अगर अपने कलीग के साथ डीलिंग करने की अच्छी जगह है तो शहर में मौजूद किटी पार्टियों की शौकीन महिलाएं यहां बैठकर इन पार्टियों को अंजाम देना पसंद करती हैं। कभी ताश के पत्तों के बीच समय बिताने या कभी सहेलियों की गॉसिप के लिए कॉफी हाउस को मुफीद जगह माना गया है। प्रसिद्ध कवि कुमार अंबुज कॉफी हाउस के कम होते महत्व के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि कॉफी हाउस की संस्कृति अब शहर में नहीं रही है। इसका सबसे बड़ा कारण बढ़ती हुई व्यवसायिकता है। वे कहते हैं कि पहले मैं गुना में रहता था। काम के सिलसिले में भोपाल अक्सर आता था तो इंडियन कॉफी हाउस जरूर जाता था। उस वक्त जो लोग कॉफी हाउस में मिलते थे, उन्होंने अब जाना बंद कर दिया। लोगों का दृष्टिकोण बदला है। यहां ऐसे लोगों की अधिकता है जो अपना स्वार्थ सिद्ध होने के उद्देश्य से कॉफी हाउस में मिलने लगे हैं। इस दौरान अगर उन दो लोगों की बातचीत चलती रहे और कोई तीसरा पहुंच जाए तो उन्हें अच्छा नहीं लगता। बदलते दौर में इंडियन कॉफी हाउस का माहौल जरूर बदला है लेकिन दूसरी टेबिल पर हो रही बातचीत से दूर अपनी टेबिल पर विचारों में मग्न हो जाना कुमार अंबुज को प्रभावित किए बिना नहीं रहता।

कमाल की है कॉफी
- 1822 में सबसे पहले फ्रेंचवासियों ने एस्प्रेसो मशीन का आविष्कार किया।
- कॉफी को यूरोप में अरेबियन वाइन के नाम से जाना जाता था।
- कॉफी की 50 से अधिक प्रजातियां दुनियाभर में मौजदू हैं।
- हर साल 50 बिलियन कप कॉफी पी जाती है जिसमें से 25 बिलियन कप कॉफी सिर्फ नाश्ते के दौरान ही खत्म हो जाती है।
- एस्प्रेसो कॉफी में 2.5 प्रतिशत वसा होती है, जबकि फिल्टर कॉफी में 0.6 प्रतिशत
वसा होती है।
- जापान में कॉफी स्पा है जहां लोग कॉफी के टब में बैठकर नहाने का मजा लेते हैं।
- इटली में इस वक्त 200,000 कॉफी शॉप्स हैं और अन्य स्थापित हो रहे हैं।
- पिछले तीन दशकों में पश्चिमी देशों के 90 प्रतिशत लोगों ने चाय छोड़कर कॉफी पीना शुरू किया है।
दर्द पर पलती मुस्कुराहटें

फिल्मी पर्दे की रौनक और चमक-दमक के बीच सिने तारिकाओं की जिंदगी झूलती रहती है। अनेक विवादों से घिरी जिंदगी केबीच भी वे कई कल्याणकारी कार्यों में लगी रहती हैं। दूसरों का जीवन चाहे उनकी वजह से रोशन हो लेकिन उनके अपने जीवन में कभी घर में मिली प्रताडऩा तो कभी बेवफाई की वजह से अंधेरा छाया रहता है। ऐसी कई सिने तारिकाएं हमारे दिलों पर छाई हुई हैं जो न सिर्फ घरेलू हिंसा की शिकार हुईं, बल्कि इसका विरोध करने पर उन्हें घर में जुल्मों सितम भी सहना पड़ा....

ग्लैमर जगत की वे सिने तारिकाएं जिनके कदम रखते ही चारों ओर से उन्हें अपने फैन्स की आवाज सुनाई देने लगती है। उनकी एक झलक पाने के लिए लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। सारी दुनिया में धूम मचाने वाली ये हसीनाएं जब अपने ही घर में प्रताडि़त की जाती हैं तो ये बात न सिर्फ उनके खुद के लिए, बल्कि उनके फैंस के लिए भी दुखदायी होती है। २010 में कोलकाता की मॉडल डिंपी गांगुली ने राहुल महाजन से शादी की थी। शादी के कुछ महीनों बाद ही राहुल द्वारा डिंपी को मारने की शिकायत आई थी। राहुल का अपनी पत्नी के साथ ये दुव्र्यवहार पहली बार नहीं है, बल्कि राहुल की पहली पत्नी श्वेता सिंह भी अपने पति के  खिलाफ शारीरिक शोषण का केस दर्ज करवा चुकी हैं। 70 के दशक में अपनी अदाओं के जलवे बिखेरने वाली दिलकश अदाकारा जीनत अमान का निजी जीवन परेशानियों से भरा रहा। अभिनेता संजय खान के साथ उनके संबंध लंबे समय तक चर्चा में रहे। इसी बीच ये बात भी लोगों की जुबान पर रही कि संजय ने जीनत अमान को कई बार मारा जिसकी वजह से उनकी आंख में चोट लगी। मोस्ट स्टाइलिश सिने तारिका के रूप में जिस अभिनेत्री के चाहने वाले न सिर्फ हिंदुस्तान में, बल्कि सारी दुनिया में रहे, उसकी दुर्दशा यह रही कि उनके दूसरे पति मजहर खान भी शादी के बाद उन्हें शारीरिक यातना देते रहे। मजहर के साथ जीनत के संबंध उनकी कैंसर से मृत्यु हो जाने के पहले तक कभी मधुर नहीं रहे। युक्तामुखी ने पिछले साल उनके पति पिं्रस तुली के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। पूर्व मिस यूनिवर्स का खिताब जीत चुकी युक्ता के अनुसार अपने पति द्वारा वे कई बार घरेलू हिंसा की शिकार हुई हैं। एक समय वो था जब 1990 में सलमान खान की एक्स गर्लफ्रेंड सोमी अली खान के साथ उनके अफेयर के चर्चे जोरों पर थे। उनके इश्क की दास्तान सलमान के दुव्र्यवहार की वजह से खत्म हुई। उसके बाद सोमी अली अमेरिका चली गईं और एक ऐसी संस्था के लिए कार्य कर रही हैं जो महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों और शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करती है। सोमी के बाद ऐश्वर्या रॉय ने सलमान के खिलाफ मारपीट की बात उन दिनों स्वीकार की थी, जब दोनों के बीच इश्क परवान पर था।  अदनान सामी की पहली पत्नी सबाह गलदारी ने 2009 में अपने पति के विरुद्ध मुंबई में शारीरिक शोषण की शिकायत दर्ज करवाई। सबाह का कहना था कि अदनान उसे जलती हुई सिगरेट से जलाता था। तीन साल तक पति के अत्याचार सहने के बाद सबाह ने अदनान से तलाक ले लिया। हॉलीवुड की मारिया केरी एक गायिका और अभिनेत्री के रूप में मशहूर हैं। मारिया का दावा था कि उनके पहले पति टॉमी मटोला उन्हें मानसिक रूप से प्रताडि़त करते हैं। इसका नकारात्मक प्रभाव न सिर्फ मारिया के निजी जीवन पर, बल्कि उनके कैरियर पर भी पड़ा। बाद में उन्होंने लेरी किंग से दूसरी शादी कर ली। व्हीटनी  ह्यूस्टन के साथ उनके पति बॉबी ब्राउन ने कई साल तक अत्याचार किया। अंत में तंग आकर ह्यूस्टन ने अपने पति के खिलाफ अदालत में कार्रवाई की। 2003 में घरेलू हिंसा के मामले में ब्राउन को जेल हुई। 2009 में प्री ग्रेमी पार्टी के दौरान रिहाना और क्रिस ब्राउन के बीच भारी भीड़ के सामने जो झगड़ा बढ़ा वो इस हद तक बढ़ा जिसकी वजह से क्रिस ने रिहाना को इतना मारा कि उनके शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान दिखाई देने लगे। इस घटना का मुख्य कारण यह था कि रिहाना ने क्रिस की गर्लफ्रेंड का मैसेज उसके सेल फोन पर पढ़ लिया था। अभिनेत्री और गायिका मेडोना को 1988 में घरेलू हिंसा का सामना उस वक्त करना पड़ा, जब वे अपने पहले पति सियेन पेन के साथ रहती थीं। उसके बाद दोनों ने तलाक ले लिया।
मेडोना की यह शिकायत थी कि उनके पति ने कभी उनसे अच्छा व्यवहार नहीं किया।
टीना टर्नर एक गायिका के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। टीना के अनुसार उनके पति इक टर्नर ने उनके साथ कई बार बलात्कार किया और वे उन्हें सिगरेट से जलाते भी थे। उनके साथ होने वाली हिंसा की घटनाओं का जिक्र टीना ने अपनी आत्मकथा में भी किया है। गवाहों के बयान के आधार पर टीना द्वारा इक पर लगाए गए सारे आरोप सही साबित हुए। जब कंगना रानाउत ने मुंबई आकर अपने कैरियर की शुरुआत की थी तो उनके इश्क की चर्चा पहले से शादीशुदा आदित्य पंचोली के साथ थी। कंगना का कहना है कि उन दिनों आदित्य ने उनके साथ मारपीट भी की थी। हॉलीवुड अभिनेत्री हेले बेरी को 2004 में उनके प्रेमी ने इतना मारा था कि जिसकी वजह से उनके कान में गहरी चोट आई थी। हालांकि हेले ने अपने प्रेमी का नाम कभी नहीं बताया। पामेला एंडरसन के साथ ली जोंस की शादीशुदा जिंदगी चार साल तक रही। इस दौरान भी पामेला को उसके पति ने गर्भावस्था में भी कई बार शारीरिक यातनाएं दीं। पामेला की शिकायत पर जॉन को जेल की हवा खानी पड़ी। टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी के उनके पति राजा चौधरी के साथ वैवाहिक संबंध हमेशा खराब ही रहे। श्वेता का कहना है कि राजा ने न सिर्फ उसे, बल्कि उसकी बेटी पलक को भी जान से मारने की कोशिश की।

शनिवार, 24 नवंबर 2012

एक और एक ग्यारह
देश के प्रसिद्ध उद्योगपति अगर उद्योग जगत में छाए रहने का दम रखते हैं तो उनकी पत्नी भी कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए कभी बिजनेसवुमेन के रूप में तो कभी सामाजिक कार्यों को बखूबी पूरा करते हुए अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। एक हमसफर के तौर पर वे एक दूजे के लिए एक एक और दो नहीं बल्कि एक और एक ग्यारह की ताकत रखते हैं....
लक्षमी मित्तल ब्रिटेन के सबसे अमीरों में शुमार है। उनकी काम के प्रति व्यस्तता को देखते हुए उनकी पत्नी लक्ष्मी मित्तल इंडोनेशिया में स्टील बिजनेस को संभाल रही हैं। उषा मुंबई में विकलांग ब"ाों के लिए स्थापित किए गए जयवकील स्कुल की जिम्मेदारियां बखूबी निभाती हैं। भारत में महिलाओं की शिक्षा की दिशा में कार्य कर रही उषा मित्तल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। विप्रो चैयरमेन अजीम प्रेमजी देश के बड़े उद्योगपति होने के बाद भी लोगों के सामने आने से अक्सर बचते हैं। अजीम प्रेमजी गरीब ब"ाों की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्ध हैं। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन में से 2 बिलियन डॉलर वे इसी दिशा में खर्च करते हैं। उनकी पत्नी यासमीन प्रेमजी इस चैरिटी की डायरेक्टर हैं। यासमीन एक लेखिका के रूप में अपनी खास पहचान रखती हैं। उनका उपन्यास डेज ऑफ गोल्ड एंड सेपिया बहुत पसंद किया गया। वह पिछले बारह सालों से सामाजिक कार्यों में व्यस्त हैं। सॉफ्टवेयर उद्योगपति नारायणमूर्ति इंफोसिस टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सह संस्थापक हैं। नारायण ने इस कंपनी की शुरूआत महज 10,000 रूपए से की थी जो उन्हें उनकी पत्नी सुधा मूर्ति ने दिए थे। आज उनकी कंपनी भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है जिसे आईटी हब के रूप में जाना जाता है। कुछ सालों पहले मूर्ति और सुधा ने
5.2 मिलियन डॉलर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को इंडियन क्लासिक्स का अनुवाद प्रकाशित करने के लिए दिए।
सुधा एक समाज सेविका और लेखक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। वे गेट फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी सदस्यों में से एक हैं।
2006 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया। सुधा समय-समय पर समाज सेवा और शिक्षा में दिए गए अपने अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित की जा चुकी  हैं। मुकेश और नीता अंबानी का नाम न सिर्फ उद्योग जगत में बल्कि मनोरंजन की दुनिया में भी छाया रहता है। मुकेश ने अपने पिता के रिलायंस एंपायर की जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। नीता धीरूभाई अंबानी इंटरनेशन स्कूल की संस्थापक हैं और शिक्षा से संबंधित कई कार्यों के साथ उनका नाम जुड़ा हुआ है। रियल हीरोज अवार्ड्स की शुरूआत रिलायंस फाउंडेशन की ही देन हैं। इसी तरह अनिल अंबानी अगर रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप को सुशोभित करते हैं तो टीना सामाजिक कार्यों में व्यस्त दिखाई देती हैं। वे कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ ही समकालीन भारतीय कला की मुख्य संरक्षक के रूप में भी जानी जाती हैं। मशहूर उद्योगपति जेएसडब्ल्यू स्टील के चैयरमेन स"ान जिंदल की कंपनी भारत में तीसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी मानी जाती है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत करनी पड़ी। आज वे एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक्स प्रेसिडेंट भी है। स"ान का साथ उनकी हमसफर संगीता जिंदल ने पूरी तरह दिया है। वह जेएसडब्ल्यू ग्रुप के जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन की निदेशक है। यह संस्था स्थास्थय, शिक्षा, आवास और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने की दिशा में कार्य करती है। वह हंपी फाउंडेशन की चैयरपर्सन हैं जो भारत की धरोहरों के संरक्षण की दिशा में कार्य करती है। देश के इन उद्योगपतियों ने काम के बल पर दुनिया भर में अपना लोहा मनवाया है। आदि गोदरेज दुनिया के सबसे अमीर पारसी हैं। वे औद्योगिक कार्यों के अतिरिक्त परोपकारी कार्यों में भी संलग्र रहते हैं। उनकी पत्नी परमेश्वर गोदरेज समाज सेविका के रूप में जानी जाती हैं। परमेश्वर आलीशान पार्टियों को आयोजित करने की कला भी बखूबी जानती है। ओपेरा विन्फ्रे  की भारत यात्रा के दौरान परमेश्वर द्वारा दी गई पार्टी आज भी लोगों की जुबान पर है। वह गेट्स फाउंडेशन की बोर्ड मेंबर और गेरे फाउंडेशन के अलावा आहवान संगठन से भी जुड़ी हुई हैं। नंदन नीलकेणी इंफोसिस के सह संस्थापक और सीईओ के रूप में जाने जाते हैं। वे इस पद पर मार्च
2002 से अप्रैल 2007 तक रहे। फिलहाल वे यूनिक आइडेंटिफिकेशन ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के चैयरमेन हैं। नंदन को भारत में नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टेवयर एंड सर्विस कंपनिज और बैंगलोर में इंडस इंटरप्रेनयोर की स्थापना करने का श्रेय भी प्राप्त है। वे वल्र्ड इकोनोमिक फोरम फाउंडेशन और बॉम्बे हेरिटेज फंड के लिए सलाहकार के रूप में भी कार्य करते हैं। उनकी पत्नी रोहिनी निलकेणी पब्लिक चैरिटेबल फाउंडेशन आघर््यम की चैयरपर्सन हैं। वे 2001 से गंदी बस्तियों में पानी और साफ-सफाई की स्थिति सुधारने की दिशा में कार्य कर रही हैं। रोहिणी कई सालों से एक पत्रकार, लेखक और समाज सेविका के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। वे प्रथम बुक्स की सह संस्थापक है जो ब"ाों को अलग-अलग भाषाओं में कम कीमत पर किताबें उपलब्ध कराने में मदद करती है। वह प्रथम इंडिया एजुकेशन इनिशिएटिव और संघमित्रा रूरल फायनेंशियल सर्विस की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स भी हैं।
उनकी संस्था माइक्रोक्रेडिट कार्यक्रम के अंतर्गत गरीबों के लिए फंड एकत्रित करती है। वे जुलाई 2002 से जुलाई 2008 तक अक्षरा फाउंडेशन की चैयरपर्सन थी। नुस्ली वाडिया एक उद्योगपति, टेक्सटाइल मैग्रेट के नाम से जाने जाते हैं। नुस्ली वाडिया रियल स्टेट के बिजनेस में जाना-माना नाम है। वे बॉम्बे डाइंग के चैयरमेन हैं। उनकी पत्नी मौरीन वाडिया हैं। मौरीन की मुलाकात नुस्ली से एयर इंडिया विमान में हुई और जल्दी ही उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया। मौरीन कंपनी के ब्रांड प्रमोशन में योगदान देती हैं। वह फेमिना मिस इंडिया की प्रायोजक  के तौर पर पहचानी जाती हैं और ऐसे कई इवेंट्स में संलग्र रहती हैं जिससे उनके ब्रांड को पहचान मिल सके। ग्लैमर की दुनिया में छाए रहने का मौरीन को बेहद शौक है और अपने इस शौक को वे बखूबी पूरा भी करती हैं। वह फैशन और स्टाइल मैगजीन ग्लेडरेग्स की संपादक है। वे वार्षिक ग्लेडरेग्स मॉडल ऑफ द ईयर और मिसेज इंडिया कांटेस्ट की प्रायोजककर्ता भी हैं।


































































































































































































शनिवार, 17 नवंबर 2012

जब दिल किसी का टूटे
माता-पिता के रिश्तों में जब दरार आती है तो इसका असर उनके बच्चों की परवरिश पर भी पूरी तरह होता है। कई बार वे विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए भी आगे बढ़ते जाते हैं और कई बार ये भी होता है कि ऐसे हालात उनकी बर्बादी की वजह बनकर सामने आते हैं। इस के माध्यम से रिश्तों के बिगड़ते ताने-बाने का असर आम जन को प्रभावित करने वाले सेलेब्स के बच्चों के जीवन को किस तरह से प्रभावित करता है, ये दर्शाने का प्रयास किया गया है...

जब अभिभावकों का ब्रेकअप होता है तो विपरीत प्रभाव उनके बच्चों के जीवन को भी पूरी तरह प्रभावित करता है। ऐसे बच्चे किसी भी तरह का कमिटमेंट करने से डरते हैं, क्योंकि उनके मन में यह भावना हमेशा रहती है कि वे अपने माता-पिता की तरह किसी भी करार को पूरा नहीं कर पाएंगे। युवराज सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही है। जिस युवा क्रिकेटर की सारी दुनिया दीवानी है, वह अपने घर में कई बार मां-बाप के बीच आई दरार की वजह से परेशान होते देखे गए हैं। यही हाल शाहिद कपूर का भी है। उनके पिता पंकज कपूर और मां नीलिमा अजीम के अलग होने के बाद वे अपने जीवन में भी किसी से वादा करने में अक्सर डरते हैं। लोगों का यह भी कहना है कि करीना के साथ उनके संबंध भी इसी तरह की असुरक्षा के चलते टूटे। शाहिद को आज भी लगता है कि शादी करने से ज्यादा जरूरी अपने कैरियर पर ध्यान देना है इसीलिए वे शादी के बंधन में बंधने के बजाय अपने कैरियर में स्थायित्व का प्रयास करते नजर आते हैं। ऐसे कलाकारों में वे अकेले नहीं हैं, जबकि 40 की उम्र से आगे निकल चुकी तब्बू आज भी शादी की बात आने पर इस सवाल का जवाब देने से कतराती हैं। महेश भट्ट जब अपने पुत्र राहुल और उसकी मां को छोड़कर चले गए तो राहुल कई सालों तक इस सदमे से निकल नहीं पाए। मनोचिकित्सक डॉ. काकोली रॉय कहती हैं कि माता-पिता के अलग होने पर बच्चे में असुरक्षा की भावना घर कर जाती है। इस भावना को दूर करके आगे बढऩे में उसे लंबा समय लगता है। वे माता-पिता जो बच्चे के सुरक्षित रहने की सबसे बड़ी वजह होते हैं, उनके न रहने पर उसका खुद को असहाय महसूस करना स्वाभाविक ही है। सच तो यह है कि बच्चों को बचपन से सिखाया जाता है कि माता-पिता के रिश्ते से बड़ा रिश्ता दुनिया में दूसरा नहीं है और जब यही अभिभावक अलग होते हैं तो बच्चे का रिश्तों पर से विश्वास उठने लगता है। ऐसे बच्चे आसानी से अपने लिए जीवनसाथी का चयन नहीं कर पाते। अगर कहीं ऐसे अभिभावकों के बच्चे संबंधों को स्वीकार कर भी लेते हैं तो उनके संंबंध बिगड़ते भी देर नहीं लगती। स्कॉटिश एक्टर गेरारर्ड बटलर मानते हैं कि मेरे पेरेंट्स जब अलग हो गए तो मेरे साथ एक अनजाना डर हमेशा रहने लगा। फिर भी मैं सोचता हूं कि उनके दरकते रिश्तों को ढोने से ज्यादा अच्छा है मैं स्वच्छंद जीवन जीने लगूं। मनोवैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि जब इन बच्चों को कहीं से आसरा नहीं मिलता तो वे अपनी आजादी को ही अपना सहारा समझकर जीने की कोशिश करने लगते हैं। धीरे-धीरे ये आजादी उन पर इतनी हावी होने लगती है कि परिवार के मायने वे भूल जाते हैं। उनके लिए बंदिशों में रहने वाले परिवार से दूर ऐसी आजादी सब कुछ हो जाती है। इन बच्चों के लिए अपनी शादीशुदा जिंदगी को निभा कर दिखाना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता। जैसा कि फिलहाल करीना कपूर के लिए कहा जा रहा है। एक ज्योतिष द्वारा उनकी शादीशुदा जीवन की तबाही की भविष्यवाणी की जो प्रतिक्रिया करीना ने व्यक्त की वो उनके गुस्से को पूरी तरह प्रकट करती है। अपनी मां बबीता और पिता रणधीर कपूर के अलग होने के बाद उन्होंने न सिर्फ कामयाबी के शिखर को छुआ, बल्कि लोगों के सामने यह आदर्श भी स्थापित किया कि अभिनय की जो कला उन्हें विरासत में मिली उस पर वे खरी उतरने की योग्यता भी रखती हैं। कई बार यह भी देखा गया है कि जिन अभिभावकों का विवाह सफल नहीं होता, उनके बच्चे भी विवाह करने पर सामंजस्य स्थापित करने में असफल होते हैं। अभिनेत्री रेखा ने माता-पिता के तलाक होने के बाद घर के बुरे हालातों से तो सामना किया ही, लेकिन उनका खुद का वैवाहिक जीवन दो बार शादी करने के बाद भी कभी सुखमय नहीं रहा। प्रतिमा बेदी और कबीर बेदी के संबंधों की दरार उनके बच्चों को भी प्रभावित करती रही। उनकी बेटी पूजा बेदी ने कुछ ही फिल्मों में अपने अभिनय के जौहर दिखाने के बाद कैरियर को आगे बढ़ाने के बजाय वैवाहिक जीवन बिताना अधिक पसंद किया। 1990 में फरहान इब्राहिम फर्नीचरवाला से उनकी पहली मुलाकात हुई और जल्दी ही दोनों ने शादी कर ली। सन 2000 में उनका तलाक हो गया। अब वे अपने दो बच्चों के साथ अकेली रहती हैं। राहुल भट्ट ने अपने माता-पिता की जो हालत देखी है उससे सबक लेते हुए वे आज भी कहते हैं कि मेरे लिए अपनी पत्नी के साथ संबंधों को निभाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मैं नहीं चाहता कि हमारे संबंधों का विपरीत प्रभाव बच्चों के जीवन को बर्बाद करने की वजह बने। कई बार यह भी होता है कि माता-पिता के संबंधों में दरार को देखते हुए बच्चे आदर्श स्थापित करने की पूरी कोशिश करते हैं और फिर उसमें सफल भी होते हैं। नीना गुप्ता और विवियन रिचड्र्स की बेटी मसाबा गुप्ता ऐसे ही बच्चों का एक जीवंत उदाहरण है। मसाबा कहती हैं, अगर माता-पिता अपने रिश्तों को निभा न सकें तो उनके बच्चों की जिम्मेदारी ऐसे में और भी बढ़ जाती है। कोशिश तो यह होना चाहिए कि वे अपने संबंधों की नींव ज्यादा समझदारी से रखें।
शक्ति दे मां

एक नारी होने के नाते शक्ति की परीक्षा मां दुर्गा ने भी दी थी और आज भी महिलाएं अपनी शक्ति का परिचय देकर लोगों के सामने मिसाल कायम करने का दम रखती हैं।  बात करें उन महिला प्रशासनिक अधिकारियों की, जिन्होंने अपनी शक्ति का परिचय देते हुए नारी शक्ति का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है....

मोनिका शुक्ला
एडिशनल एस पी, ट्रैफिक पुलिस
न्यू मार्केट में सोने के गहनों की चोरी का मामला मुझे याद है। ईव्स मिरेकल से सात-आठ किलो सोना चोरी हुआ था। जिस संदिग्ध व्यक्ति पर हमें शक था उसे बुलाकर पूछताछ की गई लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। बाद में उसके फोन की डिटेलिंग से पता चला कि उसी व्यक्ति ने बार-बार उस क्षेत्र में फोन किया था। उस व्यक्ति ने पूछताछ के बाद अपना अपराध स्वीकार किया और बताया कि उसके घर में स्थित कुएं के अंदर लगी मोटर में उसने सोना छिपाया था। वो सारा सोना हमने उस कुएं से बरामद किया था। जब मैं शाहजहांनाबाद में सीएसपी थी, तो काजी कैंप में ट्रक से टकराने पर एक बच्ची की मृत्यु हो गई थी। गुस्से में आकर लोगों ने तोडफ़ोड़ करना शुरू की। मैंने अपनी टीम के साथ फायरिंग करके भीड़ को नियंत्रित किया।
आत्मविश्वास बढ़ेगा
अपने फैसले खुद लेना सीखें। परिवार की सलाह से फैसले करना अच्छी बात है लेकिन अंतिम निर्णय आपका अपना होना चाहिए। इससे आपमें आत्मविश्वास बढ़ेगा।
अरुणा मोहन राव

एडीजी महिला सेल
1989 में जब मैं परिवेक्षक अधिकारी थी तो रायपुर में रेल लाइट एरिया से लगातार शिकायत मिल रही थी। वहां की पहली लेडी पुलिस ऑफिसर होने की वजह से मुझे वहां जाकर जांच करने को कहा गया। इस केस में वहां पदस्थ कमिश्नर और कलेक्टर ने भी हमारी बहुत मदद की और वेश्यावृत्ति में लिप्त महिलाओं के व्यवस्थापन की व्यवस्था की गई। मुझे ये संतुष्टि थी कि हमारे प्रयासों से उन महिलाओं की जिंदगी सुधर गई। मुझे वो केस भी याद है जब मैं धमतरी में एसडीओपी थी और वहां एक लड़की की मृत्यु हो गई थी। कुछ लोगों ने शिकायत की कि उसकी हत्या की गई है। जांच के बाद पता चला कि वह जिस घर में नौकरानी थी उसी घर के मालिक ने उसका शारीरिक शोषण किया था। जब वह गर्भवती हो गई तो उसका गर्भपात करवाया गया और उसी दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मैंने वहां के एसडीएम की मदद लेकर उस लड़की की लाश को खुदवाया और जब उसका पोस्टमार्टम हुआ तो पता चला कि सारी बात सच थी। बाद में उस डॉक्टर को जिसने उस लड़की का गर्भपात किया था और उस व्यक्ति को जिसने लड़की का शारीरिक शोषण किया था, सजा सुनाई गई।
आत्मनिर्भर बनें
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें ताकि आप अपनी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहें। अपने अधिकारों के लिए लडऩा सीखें। अगर आपके साथ अन्याय होता है तो उसके खिलाफ कदम उठाने की हिम्मत रखें।
रुचि वर्धन मिश्र
एसपी राजगढ़

जब मैं भोपाल में एडीशनल एसपी थी तो बेडिय़ा समाज की कई छोटी-छोटी लड़कियों के गायब होने का मामला सामने आया था। इन लड़कियों को कड़ी मेहनत के बाद अलग-अलग शहरों जैसे नागपुर, मुंबई और शिवपुरी आदि स्थानों से बरामद किया गया। इस केस में कई अपराधियों की गिरफ्तारी भी हुई। इसमें सबसे कम उम्र की जिस लड़की को बरामद किया था उसकी उम्र चार साल थी, जिन्हें वेश्यावृत्ति के लिए ले जाया जा रहा था।
संभव किया जा सकता है
अगर आप परेशान हैं तो पूरे विश्वास के साथ उस समस्या का समाधान ढंूढें। आजकल ऐसी कई संस्थाएं हैं जो आपकी मदद करने के लिए बनाई गई हैं। पारिवारिक सदस्यों की मदद से हर असंभव काम को संभव किया जा सकता है।


अनुराधा शंकर सिंह
आईजी, इंदौर
कई बार ऐसे केस सामने आते हैं जब लगता है कि इसे सुलझाना मुश्किल होगा लेकिन एक से एक कड़ी जुड़ती जाती है और मुश्किल आसान हो जाती है। जब मैं भोपाल में डीआईजी थी, उन दिनों वहां बंगलादेशी डकैतों का बहुत आतंक था। एक के बाद एक रोज ही डकैती के मामले सामने आते थे। डकैतों को पकडऩे के लिए एक टीम गठित की गई और जल्दी ही उन डकैतों को पकडऩे में हम कामयाब रहे। ऐसा ही एक केस उन दिनों का है जब मैं विदिशा में एसपी थी। वहां जगन्नाथ रथ यात्रा के समय मेला लगता है। उस मेले में एक साथ पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी। तीन-चार महीनों तक जांच जारी रही और अंतत: अपराधी पकड़े गए।

भरोसा रखना सीखें
महिलाओं को सबसे पहले अपनी योग्यता पर भरोसा रखना सीखना चाहिए। हमेशा ईमानदारी के साथ प्रयास करके आगे बढ़ें।
सुफिया कुरैशी मुद्गल
उपनिरीक्षक, मध्यप्रदेश पुलिस

कुछ दिनों पहले ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग की चोरी हुई थी। इस प्रकरण में जांच तभी संभव थी जब ऑनलाइन शेयरिंग और इससे संबंधित तकनीकी ज्ञान की जानकारी हो। इस केस के लिए सारी जानकारी इक_ा करने और तकनीकी बातों को जानने में मेहनत भी खूब हुई और अच्छे परिणाम सामने आने पर संतुष्टि भी मिली। ये लगा कि मैं अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से निभा सकी।

आगे बढऩे का प्रयास करें
अपने कर्तव्यों को निभाने के साथ-साथ अपनी विशेषताओं को समझते हुए आगे बढऩे का प्रयास करें। सफलता उन्हें मिलती है जिनमें इसे पाने का जज्बा होता है।
कवर स्टोरी
जब हुई किताबों से दोस्ती

सारा संसार किताबों में समाया हुआ है। किताबों से अच्छा कोई दोस्त भी नहीं हो सकता। हम जो मुकाम हासिल करते हैं वो किताब की ही बदौलत मिलता है। दुनिया देखने के लिए नजरिया इन किताबों से ही मिलता है। हर व्यक्ति के संघर्ष के दिनों में किताबें उसका साथ देने और हौसला बढ़ाने का काम बखूबी करती हैं। प्रस्तुत हैं किताबों को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानने वाले चंद ऐसे लेखकों के विचार जिनके जीवन में किताबों का प्रभाव देखते ही बनता है...

कविताओं में गहराई है
नीलेश रघुवंशी
मैक्सिम गोर्की द्वारा लिखित मां, निर्मल वर्मा की कहानियां, अज्ञेय की शेखर एक जीवनी, विष्णु खरे का कविता संग्रह सबकी आवाज के परदे में, विनोद कुमार शुक्त, मुक्तिबोध, जयशंकर प्रसाद और नागार्जुन की कविताएं पढऩा मुझे पसंद है।  जयशंकर प्रसाद की कविताओं में गहराई है। मुक्तिबोध हिंदी के पहले विद्वान माने जाते हैं। उनकी विद्वता उनके साहित्य से पता चलती है। विष्णु खरे ने अपनी कविताओं के माध्यम से काव्य का पूरा ढांचा ही बदल दिया। मुझे लगता है कि इनकी किताबों से जीवन की दिशा ही बदली जा सकती है।
आज भी अच्छे साहित्यकारों की कमी नहीं है, बल्कि सच तो यह है कि इतनी अधिक किताबें और पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं, जिनमें से अच्छी रचनाओं का चयन करना पाठकों के लिए मुश्किल हो जाता है। पाठकों की कमी होने के भी कई कारण हैं जिनमें सबसे पहला कारण लेखक और पाठक के बीच संवाद की कमी है। किताबें छपना आसान है लेकिन उसमें से अच्छी किताबों का चयन कर हर व्यक्ति को समय निकालकर उसका लाभ लेना चाहिए।
सोचने पर मजबूर कर दे
मंजूर एहतेशाम
प्रेमचंद की रचना गोदान और राही मासूम रजा द्वारा लिखित नया गांव पढ़कर उस समय के समाज और हालात का अंदाजा पूरी तरह लगाया जा सकता है। अगर नए लेखकों की बात करें तो नीलेश रघुवंशी ने एक कस्बे के नोट्स बहुत अच्छा लिखा है। इसी तरह अलका सराव ने कलिकथा की रचना बखूबी की है।
हर युग में लिखी गई किताबें उस वक्त के समाज और स्थितियों से अवगत कराती हैं। मुंशी प्रेमचंद ने गोदान के माध्यम से सदियों पहले किसानों के साथ होने वाले अत्याचारों का वर्णन बखूबी किया है। कृष्णा सोबती ने अपने उपन्यास जिंदगीनामा के माध्यम से जिंदगी की हकीकत को प्रदर्शित किया है।
एक महान रचना वो होती है जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर दे। महुआ मांझी का उपन्यास मरंग घोड़ा नीलकंठ हुआ, में उन्होंने आदिवासियों की परेशानियों को इतनी सजीवता के साथ प्रस्तुत किया है, जिसे पढ़कर उनकी समस्याओं का ज्ञान होता है और उनके लिए हमदर्दी होने लगती है। इसमें कोई शक नहीं कि ऐसा ही साहित्य समाज की दिशा बदलने का काम करता है।
दायरा सिमट रहा है
मालती जोशी
मैं जब स्कूल में थी तो मैंने शरतचंद्र चटोपाध्याय की महान रचना शरद साहित्य पढ़ी थी। उनकी इस रचना का प्रभाव मेरी कहानियों के रूप में भी दिखाई देता है। उन्होंने पुरुष होते हुए भी नारीमन की संवेदनाओं का सजीव चित्रण किया है।
अच्छी किताबें पढऩे वाले पाठकों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसकी बहुत बड़ी वजह टीवी और मोबाइल के प्रति लोगों की गहरी रुचि भी है। लंबी कहानी पढऩे में पाठकों की रुचि दिखाई नहीं देती। साहित्य के लिए उनके पास समय नहीं है जिसके चलते साहित्य का दायरा सिमटता जा रहा है। आज जरूरत ऐसे साहित्य की रचना करने की है जिसे सरल भाषा और सीमित शब्दों में लिखा जाए ताकि कम समय में भी पाठक उसका लाभ ले सकें।

उर्मिला शिरीष
पढऩे की लगन खत्म हो गई
लियो टॉलस्टाय द्वारा लिखित अन्ना कारेनिना और प्रेमचंद का गोदान मानवीय मूल्यों, संबंधों और उस वक्त के समाज को प्रकट करती हैं। किताबें हमारी सोच को बदलने का काम बखूबी करती हैं। मैंने एक वो दौर देखा है जब लोगों को दिन-रात किताबों के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं देता था, लेकिन आज पढऩे की लगन खत्म हो गई है। युवा पीढ़ी द्वारा किताबों के महत्व को समझने की सख्त जरूरत है।
लेखन दोयम दर्जे का है
राजेश जोशी
डॉ. तुलसी राम द्वारा लिखित मुर्दहिया, अरुण कमल का काव्य संग्रह मैं शंख महाशंख के अलावा किताब घर ने दूसरी बार दस कवियों के कविता संग्रह का प्रकाशन किया है, जो मुझे अच्छा लगा। रूसी लेखक रसूल हम्जौतौव की रचना मेरा दागिस्तान विशिष्टï शैली में लिखी गई है। मनोहर श्याम जोशी ने कुरू: कुरू: स्वाहा इतने रोचक अंदाज में लिखा है जिसे हर पाठक पढऩा चाहता है। भारतीय इंग्लिश लेखन दोयम दर्जे का है जिसके पाठक हमारे देश में अधिक हैं। इन किताबों के प्रति उनका आकर्षण हिंदी साहित्य की किताबों से अधिक दिखाई देता है।

सोमवार, 8 अक्टूबर 2012

म्हारो घाघरो जो घुम्यो

इंट्रो
एक बार फिर नवरात्रि की तैयारियां जोरों पर है। एक ओर शहर में जहां जगह-जगह झांकियां बनने की प्रक्रिया जोरों पर है, वहीं गरबा क्लासेस में गरबा सीखने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में उन गरबा प्रेमियों की भी कमी नहीं है, जो गरबा खेलते वक्त पहने जाने वाले परिधानों को फैशनेबल बनाने के लिए मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं। खासतौर से इन्हीं लोगों के लिए शहर के फैशन डिजाइनर्स नए-नए प्रयोग करने में इन दिनों व्यस्त हैं। एक नजर नए फैशन ट्रेंड पर जो आपको गरबे की रौनक बनने में मदद करेगा...

ज्योति कुमार
फैशन डिजाइनर
ट्रेडिशन बुटिक
इस बार नवरात्रि में एंकल लेंथ वाले कॉटन के हरियाणवी क्रश लहंगे बनाने जा रही हूं। ये लहंगे एंकल लेंथ हैं, जिसकी वजह से लहंगे के गरबा खेलते समय पैरों में आकर फट जाने या गंदा होने का डर नहीं रहेगा। लहंगे के साथ चोली बेकलेस और मिरर वर्क वाली होगी। दुपट्टे बांधनी या लहरिया की डिजाइन वाले होंगे। कलर की अगर बात की जाए तो पारंपरिक रेड, रॉयल ब्ल्यू, यलो को रेड या ऑरेंज के साथ कांबिनेशन करके पहना जा सकता है।
लहंगे के साथ आक्सीडाइज्ड ज्वैलरी जिसमें बीड्स, स्टोन्स, डल गोल्ड की आर्टिफिशियल ज्वैलरी का चलन रहेगा।

आपकी सलाह
कोशिश ये होना चाहिए कि डांडिया खेलने के लिए इतनी सारी भीड़ में खड़े रहने के बाद आपकी ड्रेस इतनी खूबसूरत हो जिसकी वजह से आप दूसरों से अलग नजर आएं।

मुमताज
फैशन एक्सपर्ट
मैं इस बार अनारकली को लहंगे का विकल्प बनाकर पेश कर रहा हूं। लहंगा पहनने पर आपकी ड्रेस तीन पीस में हो जाती है, जबकि अनारकली दो पीस वाली ड्रेस है। नौ मीटर के घेर वाले अनारकली कुर्ते तैयार किए जा रहे हैं। इतने घेर वाले अनारकली कुर्ते भोपाल में इससे पहले किसी ने नहीं बनाए। जार्जेट, शिफॉन, बांधनी, जयपुरी प्रिंट के साथ बॉर्डर पर वर्क और जरी व जरदोजी वाले दुपट्टे कॉलेज गोइंग गल्र्स को लुभाएंगे। इन्हें डबल कलर वाले बनाया जा रहा है। इसके अलावा लांग फ्रं ट ओपन कुर्ते को गाउन केे रूप में पेश किया जा रहा है। अनारकली की लंबाई कम करके इसे स्टाइलिश बनाने की कोशिश की जा रही है। करांची पैटर्न वाले कुर्तों के साथ अम्ब्रेला पायजामे तैयार किए जा रहे हैं।
 लड़कों के लिए जामावार और ब्रोकेड की शेरवानी या कुर्ते पेश हैं। धोती के साथ शार्ट कुर्ते और बाघ या सिल्क के कुर्तों के साथ पटियाला सलवार अच्छी लगेगी।
आपकी सलाह
चमकीले कपड़ों का फैशन पूरे फेस्टिवल सीजन में छाया रहेगा। इसका फायदा उठाएं और अपनी ड्रेस को स्टाइल के साथ पहनकर गरबे में छा जाएं।
जुनैद खान
फैशन डिजाइनर
ग्लिटर बुटिक
मल्टी कली वाले लहंगे जैसे 36 या 52 कली वाले लहंगे तैयार किए जा रहे हैं। कॉटन युक्त इन लहंगों के साथ चौड़े गोटे का इस्तेमाल किया जा रहा है। शाम में हल्की सी ठंडक को देखते हुए ब्राइट कलर गरबा ड्रेस के लिए उपयुक्त होंगेे इसलिए मैजेंटा, मस्टर्ड, रेड कलर को सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है। लड़कों के लिए हल्के रंग की धोती के साथ गहरे रंग का कुर्ता तैयार किया जा रहा है। कुर्ते के लिए लड़के पर्पल, ब्लू, मस्टर्ड और ग्रीन कलर पसंद कर रहे हैं।
आपकी सलाह
गरबा ड्रेस के रूप में आप अपनी पसंद के अनुसार चाहे जो भी चुनें लेकिन सुविधा का भी ध्यान रखें, क्योंकि गरबा खेलते समय सुविधायुक्त परिधान भी जरूरी है।
पूर्वी सोजतिया
फैशन डिजाइनर

इस नवरात्रि पर सॉलिड कलर लड़कियों और लड़कों दोनों की पहली पसंद है। ऑरेंज के साथ पिंक या ग्रीन के साथ यलो कलर को पसंद किया जा रहा है। फिल्म 'हीरोइनÓ में करीना कपूर ने जो लहंगे हलकट जवानी गाने में पहने हैं, वे फैशन में इन हैं। इसके साथ ही कपल्स अपनी पसंद के अनुसार एक जैसे गरबा आउटफिट्स तैयार करवा रहे हैं। गरबा ड्रेस के साथ एंटीक ज्वैलरी छाई हुई है। हर ड्रेस के साथ अलग-अलग ज्वैलरी पहनने वाले लोग अधिक हैं। एक बार फिर वुडन बैंगल्स को हाथ भरकर पहनना लड़कियां अधिक पसंद कर रही हैं। राजस्थानी कड़ों में व्हाइट के अलावा मल्टी कलर भी उपलब्ध हैं। मल्टी कलर की चूडिय़ां रेशम वर्क में भी मिल रही हैं। इन चूडिय़ों के टूटने का डर नहीं रहता इसलिए इन्हेंं अधिक संख्या में पसंद किया जा रहा है। हर ड्रेस के साथ मैचिंग एक्सेसरीज की मांग जोरों पर है। फैशन के ऐसे दीवानों की भी कमी नहीं है जो नवरात्रि में नौ दिनों तक खेले जाने वाले गरबे के हर दिन के लिए अलग-अलग ड्रेस और उसके साथ मैचिंग एक्सेसरीज का चुनाव कर रहे हैं। अगर बात डिजाइनर डांडिया की करें तो अपनी ड्रेस के साथ मैचिंग डांडिया पसंद किया जा रहा है। इन दिनों डिजाइनर डांडिया की 11 से 15 डिजाइन बाजार में आ गई हैं।
शुचि श्रीवास्तव
फैशन एवं टेक्सटाइल एक्सपर्ट
सेंटर हेड आईआईएफटी
इस बार नवरात्रि पर अनारकली कुर्ते और हमेशा की तरह डिजाइनर लहंगे छाए रहेंगे। लहंगे में ब्रोकेड के साथ मिरर वर्क किया गया है। अगर हम कलर की बात करें तो ब्राउन, रेड, मैरून, यलो और पिंक कलर की धूम रहेगी। लड़कों के लिए यलो, क्रीम, रेड, ऑरेंज, ब्ल्यू या ब्लैक कलर के कुर्तों के साथ पायजामा या धोती पर काम किया जा रहा है। उनके डिजाइनर कुर्तों को मिरर और काथा वर्क से सुंदर बनाया जा रहा है। डेनिम में पफ पॉकेट डेनिम के कुर्ते गरबा ड्रेस के रूप में इस साल देखने को मिलेंगे। इस स्टाइल में कुर्ते की जेब के पास से घेर ज्यादा और नीचे की तरफ  कम होता जाता है।
आपकी सलाह
कई लड़कियां हैवी वर्क वाले लहंगे पहनना पसंद करती हैं। इन लहंगों पर किया गया वर्क उलझकर खराब होने का डर बना रहता है इसलिए अधिक हैवी वर्क वाले परिधान सभी को पहनने से बचना चाहिए।


सलीका भी जरूरी है

- हैवी लहंगे को पहनने के लिए हैवी या जड़ाऊ नेकपीस आपको एथनिक लुक देगा।
- पुराना हैवी लहंगा पड़ा हो, तो उसे प्लेन टी-शर्ट के साथ पहनें, ये आपको परफेक्ट कैजुअल लुक देगा।
- ज्यादा हैवी ड्रेस के साथ दुपट्टा न लें।
- आई मेकअप को स्मोकी इफेक्ट दें। होंठों पर डार्क लिपस्टिक लगाने से बचें। सिर्र्फ ग्लॉस लगाएं।
- लहंगे के साथ आप डेनिम जैकेट भी पहन सकती हैं।
- हैवी हेयर स्टाइल से बचें।
- हैवी चोली यूं ही पड़ी हो तो
कंट्रास्ट कलर की प्लेन टी-शर्ट या टॉप पहनें। इसके ऊपर चोली आपको एथनिक लुक देगी।
- इस लुक में आप हेयर स्टाइल और मेकअप के साथ एक्सपेरिमेंट कर सकती हैं।


कुछ नया ट्राई करें
- हैवी दुपट्टा यूज में न आ रहा हो तो उसे कैजुअल टॉप व कोट के साथ पहनें।
- इसे स्कार्फ या स्टोन की तरह कैरी करें।
- मेकअप कम करें और बालों को खुला छोड़ दें।
- कम से कम एक्सेसरीज यूज करें। प्रिंटेड व एम्ब्रॉयडर्ड टॉप या जैकेट पहनने से बचें।